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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 161 · 185/240

कीर्तन 151–200

कीर्तन 161 · Kirtan 161

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

12 source linesपुस्तक पृष्ठ 258–259PDF 279–280

त्रेता में जोइ बनि आये राम, द्वापर में सोइ बनि आये श्याम।

(नथवारी रंगीली महलवारी)

त्रेता में जोइ बनि आये राम, द्वापर में सोइ बनि आये श्याम।

त्रेता में सीता बने राम, द्वापर में श्यामा बने श्याम।

त्रेता में सूधो मुकुट राम, द्वापर में टेढ़ो मुकुट श्याम।

त्रेता में अति गम्भीर राम, द्वापर में अतिशय चपल श्याम।

त्रेता में सीता सेव्य राम, द्वापर में श्यामा दास श्याम।

त्रेता में लक्ष्मण भ्रात राम, द्वापर में दाऊ भ्रात श्याम।

त्रेता में आये अवध राम, द्वापर में आये ब्रजधाम श्याम।

Source page 259

त्रेता में धारे धनुष राम, द्वापर में धारे मुरली श्याम।

त्रेता में इक पत्नी व्रत राम, द्वापर में अगणित बाम श्याम।

त्रेता में धारे नेम राम, द्वापर में धारे प्रेम श्याम।

दोउ पूर्ण काम हैं श्याम राम, दोउ हैं “कृपालु” एक राम श्याम॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १185
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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