जयति रँगीली महलन वारी,
जयति जयति वृषभानुदुलारी।
जयति लाड़ली चूनरि वारी,
जयति जयति जय कीर्ति कुमारी।
जयति किशोरी भोरी भारी,
जयति जयति चितवनि अति प्यारी।
जयति नासिका बेसर वारी,
जयति जयति प्यारी नथवारी।
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जयति नील अंबर तनुधारी,
जयति कुंज गह्वर वनचारी।
जयति गवनि गज लजवनि हारी,
जयति जयति पग पायल वारी।
जयति संग अगनित ब्रजनारी,
जयति जयति गह्वर वन वारी।
जयति सखिन हर्षाने वारी,
जयति जयति मृदु मुसकनि वारी।
जयति कृपालु सरल सुकुमारी,
जयति जयति कस मोहिं बिसारी।
जयति प्रणत अनुकम्पाकारी,
जयति नवल लीला विस्तारी।
जयति लली बरसाने वारी,
जयति जयति जय प्रियतम प्यारी।
जयति भजत जेहि कुंजबिहारी,
जयति जयति कहि प्रानन प्यारी।
जयति बंक भौं लखत बिहारी,
जयति जयति अति डरत मुरारी।
जयति मान कर जब जब प्यारी,
जयति जयति रिझवत बनवारी।
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जयति चलति जब कुँवरि सवारी,
जयति जयति कह रासबिहारी।
जयति प्रेम रस रूप उजारी,
जयति जयति गिरिधर बलिहारी।
जयति गौर तनु लखि सुकुमारी,
जयति जयति लख निज तनु कारी।
जयति गौर मुख लखि बनवारी,
जयति जयति निज सुरति बिसारी।
जयति रँगीली महल बिहारी,
जयति मदन मोहन मनहारी।
जयति अकारण करुणाकारी,
जयति महाभावहि अवतारी।
जयति प्रेम मादन रसधारी,
जयति “कृपालु” निकुंज बिहारी।
जोइ भानुनंदिनि, सोइ नँदनंदन,
सोइ सत चित सुखघन वृंदावन।
श्याम नाम रूप लीला धाम गुन गन जन,
इनमें न भेद कछु सबमें है सब मन।