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ब्रज रस माधुरी

PART I · Prayers and aartis · 9/240

प्रार्थना एवं आरती

आरती · Aarti

15 source linesपुस्तक पृष्ठ 3PDF 24

भगवती माँ की आरती

आरती भगवति माँ की कीजै,

जय जय जननि जगद्गुरु की जै।

सुकृत कौन अस वेद बतायो,

जासों लाल कृपालुहिं पायो।

बनि जननी निज गोद खिलायो,

सब विधि हलरायो दुलरायो।

मोहिं निज सुत सेवा वर दीजै,

जय जय जननि जगद्गुरु की जै।

तेरो सुत मानत सब तेरो,

माँ इक काम करा दे मेरो ।

मोहिं सो ले बनाय निज चेरो,

रहिहौं ऋणी तोर बहुतेरो।

माँ हौं हूँ तव सुत सुन लीजै,

जय जय जननि जगद्गुरु की जै ।

ब्रज रस माधुरी · भाग १009
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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