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भगवती माँ की आरती
आरती भगवति माँ की कीजै,
जय जय जननि जगद्गुरु की जै।
सुकृत कौन अस वेद बतायो,
जासों लाल कृपालुहिं पायो।
बनि जननी निज गोद खिलायो,
सब विधि हलरायो दुलरायो।
मोहिं निज सुत सेवा वर दीजै,
जय जय जननि जगद्गुरु की जै।
तेरो सुत मानत सब तेरो,
माँ इक काम करा दे मेरो ।
मोहिं सो ले बनाय निज चेरो,
रहिहौं ऋणी तोर बहुतेरो।
माँ हौं हूँ तव सुत सुन लीजै,
जय जय जननि जगद्गुरु की जै ।
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