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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 149 · 173/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 149 · Kirtan 149

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

11 source linesपुस्तक पृष्ठ 246PDF 267

नृप दशरथ घर अजिर बिहारी।

(परिक्रमा)

नृप दशरथ घर अजिर बिहारी।

शरण शरण मैं तो शरण तिहारी।।

जय जय पूर्णकाम रूप रस धाम राम।

जय जय कोटि कोटि काम अभिराम राम।।

जय जय अवधपति रघुपति श्री राम।

जय जय जगतपति, सियपति श्री राम।।

आजु अवध महँ प्रकटे राम।

बोलो जय राम, जय राम जय जय राम।।

श्रुति कह जाको रूप न नाम।

सोइ नर तनु धरि प्रकटे राम।।

ब्रज रस माधुरी · भाग १173
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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