कीर्तन 1–50
कीर्तन 17 · Kirtan 17
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ब्रजराज आज फिर आजा, ब्रज महँ ब्रजरस बरसाजा।
ब्रजराज आज फिर आजा, ब्रज महँ ब्रजरस बरसाजा।
ब्रजराज आज फिर आजा, निज बालरूप दिखराजा।
ब्रजराज आज फिर आजा, निज शिशु लीला दिखराजा।
ब्रजराज आज फिर आजा, निज तोतरि बोल सुनाजा।
ब्रजराज आज फिर आजा, निज घुटुवनि चाल दिखाजा।
Source page 47
ब्रजराज आज फिर आजा, आकर मम उर पुनि नाजा।
ब्रजराज आज फिर आजा, सोइ गूँ गूँ शब्द सुना जा।
ब्रजराज आज फिर आजा, धुनि मुरली मधुर बजा जा।
ब्रजराज आज फिर आजा, वृषभानुलली गुन गा जा।
ब्रजराज आज फिर आजा, रूठी मानिनिहिं मना जा।
