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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 17 · 41/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 17 · Kirtan 17

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

15 source linesपुस्तक पृष्ठ 46–47PDF 67–68

ब्रजराज आज फिर आजा, ब्रज महँ ब्रजरस बरसाजा।

(मेरे प्रानन प्यारे...)

ब्रजराज आज फिर आजा, ब्रज महँ ब्रजरस बरसाजा।

ब्रजराज आज फिर आजा, निज बालरूप दिखराजा।

ब्रजराज आज फिर आजा, निज शिशु लीला दिखराजा।

ब्रजराज आज फिर आजा, निज तोतरि बोल सुनाजा।

ब्रजराज आज फिर आजा, निज घुटुवनि चाल दिखाजा।

ब्रजराज आज फिर आजा, टुक दँतुलिन किलक सुनाजा।

ब्रजराज आज फिर आजा, माखन मिश्री पुनि खाजा।

Source page 47

ब्रजराज आज फिर आजा, आकर मम उर पुनि नाजा।

ब्रजराज आज फिर आजा, सोइ गूँ गूँ शब्द सुना जा।

ब्रजराज आज फिर आजा, धुनि मुरली मधुर बजा जा।

ब्रजराज आज फिर आजा, वृषभानुलली गुन गा जा।

ब्रजराज आज फिर आजा, रूठी मानिनिहिं मना जा।

ब्रजराज आज फिर आजा, दर्शन की प्यास बुझा जा।

ब्रजराज “कृपालु जु” आजा, इन नैनन तपन बुझा जा।

ब्रज रस माधुरी · भाग १041
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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