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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 81 · 105/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 81 · Kirtan 81

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

39 source linesपुस्तक पृष्ठ 151–153PDF 172–174

श्री राधे राधे राधे राधे राधे।

प्राणधन राधे राधे राधे।

जीवनधन राधे राधे राधे।

परमधन राधे राधे राधे।

धरो रे मन निशिदिन ध्यान राधे।

तजो न मन इक छिन ध्यान राधे।

सुमिरु मन निशिदिन, राधे राधे।

सोउ तो सुमिरहु रूप राधे।

जागु तो सुमिरहु रूप राधे।

Source page 152

हँसहु तो सुमिरहु रूप राधे।

रोउ तो सुमिरहु रूप राधे।

चलहु तो सुमिरहु रूप राधे।

बैठु तो सुमिरहु रूप राधे।

मरहु तो सुमिरहु रूप राधे।

जीयहु तो सुमिरहु रूप राधे।

जीत में सुमिरहु रूप राधे।

हार में सुमिरहु रूप राधे।

लाभ में सुमिरहु रूप राधे।

हानि में सुमिरहु रूप राधे।

रटो रे मन छिन छिन नाम राधे।

जपहु नित श्वासहिं नाम राधे।

रुदन करु लै लै नाम राधे।

नाम महँ नित रह, नामी राधे।

बेर जनि करु भजु नाम राधे।

बड़ो राधे ते नाम राधे।

रटें नित हरिहूँ नाम राधे।

गाव मुरलिहिं पिय नाम राधे।

भजेँ पिय तहँ सुनि नाम राधे।

Source page 153

दिव्य चिन्मय है नाम राधे।

भेद नहिं नामिहिं नाम राधे।

न भूलो पल आधे, राधे राधे।

जाहु पुनि पुनि तेहि धाम राधे।

गाउ गुन अगनित उनके राधेे।

शरण गहु उनके जन के राधे।

राखु निज रुचि उन रुचि महँ राधे।

देखु जित उनहिंन रूप राधे।

न छोड़ूँ तोरा पाछा राधे राधे।

भरोसा तोरा भारी राधे राधे।

“कृपालुहुँ” सुधि लो अब तो राधे।

ब्रज रस माधुरी · भाग १105
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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