लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · Practice and instructions · 20/240

साधना एवं निर्देश

मार्गदर्शन · Guidance

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 20PDF 41

देखो भैया!

श्री राधाकृष्ण ही तुम्हारे सर्वस्व हैं।

उन्हें बिलकुल ही अपना समझो। यह न

सोचो कि वे तो [अस्पष्ट]

भगवान आदि हैं। वे सदा अपने दोनों हाथों

को पसारे हुये तुम्हारे लिये खड़े हैं। केवल

तुम एक बार समस्त सांसारिक विषयों से

मुख मोड़कर उनकी ओर देख दो। बस,

फिर वे तुम्हारे सब [अस्पष्ट]।

वे तो अकारण करुण हैं, तुम्हारे पापाचारादि

की भी [अस्पष्ट] नहीं रखते। उनका तो

स्वभाव ही है अकारण कृपा करने का।

तुम विश्वास कर लो, बस, [अस्पष्ट]

तुम अपने आप को सर्व संबंधों [अस्पष्ट]

हाथों बेच दो, वे सब ठीक कर लेंगे।

फिर [अस्पष्ट]

[अस्पष्ट]

[अस्पष्ट]। एक बार ऐसा

करके देखो।

तुम्हारा

कृपालुदास

हस्तलिखित पृष्ठ का आंशिक, अप्रमाणित पाठ। जिन शब्दों का स्पष्ट पठन सम्भव नहीं हुआ, वे [अस्पष्ट] से चिह्नित हैं। पूरा मूल पृष्ठ नीचे है।
देखो भैया! — मूल हस्तलिखित स्रोत पृष्ठ
ब्रज रस माधुरी · भाग १020
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text