कीर्तन 101–150
कीर्तन 145 · Kirtan 145
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जय जय राम, जय जय राम,
करें योगी रमन याते तेरो नाम राम।
जा ते जग जा में जग जो है जग सोइ राम।
नाचें निज छवि लखि अस मोहक राम।
तोहिं भूलूँ न भूलेहुँ पल छिन राम।
मैं हूँ पतित, पतितपावन तुम राम।
निज रिपु असुरन बधि दिय निज धाम।
दिये प्रेम गीध, शबरिहुँ तुम राम।
जूठे बेर खाय शबरिहिं किय पूर्णकाम।
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लाओ जनकनन्दिनिहुँ सँग महँ राम।
जय जय जुग जुग जिये जोरी सीता राम।
जय जय पूर्णकाम सुखधाम सीताराम।
