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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 145 · 169/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 145 · Kirtan 145

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

24 source linesपुस्तक पृष्ठ 243–244PDF 264–265

जय जय राम, जय जय राम,

(कृष्ण गोविन्द गोविन्द...)

जय जय राम, जय जय राम,

जय जय राम, जय जय राम।

करें योगी रमन याते तेरो नाम राम।

जा ते जग जा में जग जो है जग सोइ राम।

नाचें निज छवि लखि अस मोहक राम।

तोहिं भूलूँ न भूलेहुँ पल छिन राम।

चर अचर, अचर चर किय तुम राम।

मैं हूँ पतित, पतितपावन तुम राम।

बिनु कारण करुणाकर तुम राम।

निज रिपु असुरन बधि दिय निज धाम।

दिये प्रेम गीध, शबरिहुँ तुम राम।

जूठे बेर खाय शबरिहिं किय पूर्णकाम।

किये श्राद्ध कर्म गीधहिं दिये निज धाम।

आओ भरत शत्रुघन लछिमन राम।

Source page 244

लाओ जनकनन्दिनिहुँ सँग महँ राम।

जिओ जुग जुग चारिहुँ भइयन राम।

जय जय जुग जुग जिये जोरी सीता राम।

जय जय सदा सुहागिनि सीता बाम।

दोउ जल तरंग सम सीता राम।

जय जय पूर्णकाम सुखधाम सीताराम।

जय जय हमरिहुँ सुधि लो सीताराम।

टुक हेरहु मो ढिंग सीता राम।

तुमहूँ “कृपालु” जय सीता राम।

ब्रज रस माधुरी · भाग १169
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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