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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 56 · 80/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 56 · Kirtan 56

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

17 source linesपुस्तक पृष्ठ 121PDF 142

भज ब्रजरस खानी राधारानी।

(कृष्णा गोविन्द गोविन्द...)

भज ब्रजरस खानी राधारानी।

भज ब्रज ठकुरानी राधारानी।

भज प्रेम सुधा रस सुखदानी।

भज महरानिहुँ की महरानी।

विहरत वृन्दावन रजधानी।

जाकर चाकर सारँग पानी।

भज पतितन हित अवढर दानी।

जेहि ब्रह्म श्याम स्वामिनि मानी।

जाकर कर गिरिधर अगवानी।

जेहि किंकरि उमा रमा बानी।

मम स्वामिनि राधा रानी अब जानी।

राधा रानी ही हैं मेरी गति अब मानी।

बिनु हेतु सनेहिनि राधा रानी।

हैं अधम उधारिनि राधा रानी।

हैं पतितपावनी, राधा रानी।

हैं मम “कृपालु” इक राधा रानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १080
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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