लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 32 · 56/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 32 · Kirtan 32

Ab to kripa karo Shri Radhey · Roman pronunciation · site label

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

33 source linesपुस्तक पृष्ठ 67–68PDF 88–89

अब तो कृपा करो श्री राधे!

तुम्हरे द्वार परो श्री राधे!

जात त्रिताप जरो श्री राधे!

हौं हौं पतित खरो श्री राधे!

मम अघ यमहुँ डरो श्री राधे!

माया मोह हरो श्री राधे!

मम उर महँ विहरो श्री राधे!

अवगुण चित्त न धरो श्री राधे!

चह शिशु बनि झगरो श्री राधे!

मम पापन न डरो श्री राधे!

शठ मन हठहिं अरो श्री राधे!

माया तिमिर हरो श्री राधे!

बूड़त कर पकरो श्री राधे!

अब जल नाव भरो श्री राधे!

अब जनि बेर करो श्री राधे!

मम उर भगति भरो श्री राधे!

Source page 68

चह पद रति न तरो श्री राधे!

हौं “कृपालु” तुम्हरो श्री राधे!

मेरी राधे प्रेम अगाधे !

मेरी राधे प्रेम सुधा दे !

मेरी राधे झलक दिखा दे !

हे राधे राधे !

श्री राधे राधे !

जय श्री राधे !

जय श्री राधे राधे !

स्वामिनि राधे !

जय राधे राधे !

जय राधे जय राधे राधे !

तू मेरी राधे !

मैं तेरी राधे !

तू मेरी मैं तेरी राधे !

कृपामयी राधे !

दयामयी राधे !

ब्रज रस माधुरी · भाग १056
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text