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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 166 · 190/240

कीर्तन 151–200

कीर्तन 166 · Kirtan 166

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

22 source linesपुस्तक पृष्ठ 261–262PDF 282–283

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

(प्यारी प्यारी भोरी भारी)

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

तुम तो पुकारो रोके आठों याम राम राम,

भाजे भाजे अइहैं नयनाभिराम राम राम।

रसना ते गावो राम मन ते भी ध्यावो राम,

बिनु श्रम पावो राम भाव राखि निष्काम।

बाहर भी हैं राम भीतर भी हैं राम,

वेदों में बताये राम जो भी माने पाये राम।

Source page 262

जय सियाराम जय श्यामा श्याम।

त्रेता में जोइ सीताराम,

द्वापर में सोइ श्यामा श्याम।

अवध बिहारी राजा राम,

वृन्दाविपिन बिहारी श्याम।

मर्यादा पुरुषोत्तम राम,

ब्रज रस रसिक शिरोमणि श्याम।

ब्रह्म एक ही है द्वै नाम,

तेहि कहु राम अथवा कहु श्याम।

एक पत्नीव्रत राजा राम,

अगनित पत्नीव्रत घनश्याम।

धर्म प्रचारक राजा राम,

प्रेम प्रचारक है घनश्याम।

ब्रज रस माधुरी · भाग १190
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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