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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 119 · 143/240

कीर्तन 101–150

कीर्तन 119 · Kirtan 119

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

14 source linesपुस्तक पृष्ठ 217PDF 238

श्यामा प्यारी की जय, नथवारी की जय।

(राधेरानी की जय)

श्यामा प्यारी की जय, नथवारी की जय।

बोलो बरसाने वारी की जय जय जय॥

श्याम प्यारे की जय, वंशीवारे की जय।

बोलो पीतपट वारे की जय जय जय॥

प्राण प्यारे की जय, प्राण प्यारी की जय।

गर डारे बाँह छवि न्यारी की जय॥

बनवारी की जय, नथवारी की जय।

दोउ चिन्मय दिव्य तनु धारी की जय॥

तनु गोरी की जय, रस बोरी की जय।

चितवनहिं पिया चित चोरी की जय॥

मेरे प्यारे की जय, मेरी प्यारी की जय।

इक चंचल इक भोरी भारी की जय॥

दोउ पर “कृपालु” दोउ वारी की जय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १143
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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