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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 63 · 87/240

कीर्तन 51–100

कीर्तन 63 · Kirtan 63

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

10 source linesपुस्तक पृष्ठ 131PDF 152

रँगीली महलन वारी, सोइ मम वृषभानुदुलारी ।

(मेरो प्रियतम कुंज बिहारी...)

रँगीली महलन वारी, सोइ मम वृषभानुदुलारी ।

रँगीली महलन वारी, सोई बरसाने वारी।

रँगीली महलन वारी, सोई नथबेसर वारी।

रँगीली महलन वारी, सोेई नीलाम्बर वारी।

रँगीली महलन वारी, जेहि सँग लख लख ब्रजनारी।

रँगीली महलन वारी, बनवारी जा पर वारी।

रँगीली महलन वारी, जेहि पद रज चह बनवारी।

रँगीली महलन वारी, जेहि पग चापत बनवारी।

रँगीली महलन वारी, जेहि हौं “कृपालु” उरधारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग १087
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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