कीर्तन 1–50
कीर्तन 37 · Kirtan 37
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तोपै वारी वारी बरसाने वारी प्यारी।
मैं ही नहीं वारी बनवारी वारी वारी।
तोपै कोटि उमा रमा नारी वारी प्यारी।
Source page 81
बरसाने वारी ब्रजरस वारी प्यारी।
रस बरसाने वारी प्यारी प्यारी प्यारी।
ब्रजरस बरसाने वारी मेरी प्यारी।
ब्रज रस बरसाने वारी आईं प्यारी।
लूटो ब्रज रस बरसाने आईं प्यारी।
लूटो ब्रज रस बरसाने आईं प्यारी।
पीलो छकि ब्रज रस प्याने आईं प्यारी।
डूबो रस सिंधु डुबाने आईं प्यारी।
तेरे रोम-रोम ब्रज रस चुवे प्यारी।
ब्रज रस ही बनि गयो तनु प्यारी।
कीर्तिकुमारी नथवारी मेरी प्यारी।
राधा कुंज सेवाकुंज वारी प्यारी।
मैं हूँ प्यारी जू की मेरी प्यारी जू हैं प्यारी।
मैं तो वापै वारी जाऊँ जो भी बोले प्यारी।
Source page 82
नथवारी प्यारी बेसर वारी प्यारी।
भोरी भारी अँखियन चितवनि प्यारी।
वेणी कारी घुँघरारी अनियारी प्यारी।
गोरे-गोरे तन पर नीली-नीली सारी।
Source page 83
बिछुवनि छवि पग अँगुरिन प्यारी।
नित नई नई मोहिँ लागे छवि प्यारी।
तेरी छवि ऐसी लखि तू भी मोहे प्यारी।
प्यारी लखि मोहें प्यारी प्यारी अस प्यारी।
औरों की का कहूँ प्यारी तू भी वारी प्यारी।
जापै सब वारी सोऊ तोपै प्यारी वारी।
मैं तो नङ्क्षह वारी कै से मानू तोहिं प्यारी।
निज तनु परछाईं लखि मोहें प्यारी।
प्यारी सम प्यारी प्यारी केवल प्यारी।
सब प्यारी अवतार प्यारी अवतारी।
लखि निज छवि मोहें भोरी भारी प्यारी।
Source page 84
जादू की पिटारी रोम रोम तनु प्यारी।
जेति बार लखूँ लागे रस बड़ प्यारी।
रोम रोम दृग हो तो लखूँ छकि प्यारी।
दृग में पलक मेरी बैरिनि प्यारी।
लख लख ब्रजनारी चलें पाछे प्यारी।
रस को भी सरस बनाने वारी प्यारी।
बनवारी हूँ न पायो तेरो पार प्यारी।
जाको तू जना दे सोइ जानें तोहिं प्यारी।
रस को भी रसिक बनाने वारी प्यारी।
प्राणप्यारे प्यारे ते भी प्यारी मेरी प्यारी।
पिय तो हैं प्राण तू तो प्राणन प्यारी।
प्यारी अस प्यारी प्यारी वारी वारी वारी।
अचरज यह तोपै तू भी वारी प्यारी।
जापै सब वारी सोउ तोपै वारी प्यारी।
वारी कोटि बनवारी तोहिं लखि प्यारी।
बलिहारी बोले बनवारी लखि प्यारी।
Source page 85
कारो कारो नटवर गोरी गोरी प्यारी।
गोरा गोरा तनु लखि पिय लाजें प्यारी।
पियहुँ झुके सिर लखि तनु प्यारी।
पिय नहिं लखि सक अस प्यारी प्यारी।
पिय वारी वारी जाएँ लखि छवि प्यारी।
दृगन बचा के पिय देखें छवि प्यारी।
राई नोन वारें पिय लखि छवि प्यारी।
जिन मोहे त्रिभुवन तिन मोहे प्यारी।
तोको लखि बनवारी बलिहारी प्यारी।
तरु जनु गिरें हरि लखि छवि प्यारी।
कर ते मुरलि गिरे लखि छवि प्यारी।
भूलें सुधि पिय लखि तनु छाया प्यारी।
गिरें भू पै बनवारी लखि छवि प्यारी।
काला टीका दें “कृपालु” लखि छवि प्यारी।
Source page 86
अगवानी करें पिय जायँ जहाँ प्यारी।
“जय हो” “जय हो” पिय बोलें पाछे चलि प्यारी।
वाके पाछे पिय डोलें जोई बोले प्यारी।
पिय तेरे पाछे डोलें बनु सखि प्यारी।
पिय को जो पाना चाहो बनो सखि प्यारी।
पिय को मिलन चाहो रोओ आगे प्यारी।
पिय भाजे अइहैं तुम बोलो प्यारी प्यारी।
लखि पिय उर परछाईं रूठें प्यारी।
थर थर काँपे पिय लखि मान प्यारी।
माथे पे पसीना आवै लखि मान प्यारी।
सिट्टी पिट्टी भूलें पिय रूठीं लखि प्यारी।
कापेँ पिय लखि टेढ़ी भृकुटिन प्यारी।
रो के कह सखि सों दिखा दे छवि प्यारी।
सुखघन को भी रुलाने वारी प्यारी।
पिय सखि पग परें रूठीं लखि प्यारी।
प्यारी बनि पिय रिझवत नित प्यारी।
वारी हरिहुँ को तरसाने वारी प्यारी।
Source page 87
पिय माँगें मुख वारी जूठी बीरी प्यारी।
पिय दें, बुहारी गहवर वन प्यारी।
पिय माँगें महल टहल दे दो प्यारी।
चँवर ढुरावें पिय चहुँ दिसि प्यारी।
सेज सजावें पिय तब सोएँ प्यारी।
पिय हौले हौले डरि चापें पग प्यारी।
सब को नचाने वाले को नचाने वारी।
छलिया के छक्के छुड़ाने वारी प्यारी।
पिय छल छन्द भूलें लखि छवि प्यारी।
विभु होके रोके ढूँढ़े कहाँ गईं प्यारी।
Source page 88
पिय जित देखें तित दीखें प्यारी प्यारी।
प्रेम भिखारी पिय दाता मेरी प्यारी।
पिउ तो है अग्नि सम, दाहिका हैं प्यारी।
पिय तो कपूर सम, गंध सम प्यारी।
पिउ तो हैं दुग्ध सम श्वेतिमा हैं प्यारी।
पिउ परमात्मा की आत्मा हैं प्यारी।
पिउ नहिं पावै, पावै मादन प्यारी।
न्याय करें बनवारी कृपा करें प्यारी।
प्यारो बड़ो निष्ठुर दयामयी प्यारी।
पिय प्यारी में जो चुनना हो चुनो प्यारी।
रोतो रोतो ढूँढेँ कुंज कुंज पिय प्यारी।
मुरलि में गावें छिन छिन गुन प्यारी।
पिय तनु रोम रोम बोले प्यारी प्यारी।
पिय करें कृपा पाके तेरी कृपा प्यारी।
पिय जनु वारिद सिंधु जनु प्यारी।
बनवारी को तो माने जानि जन प्यारी।
बिनुहि बुलाये आयें पिय ढिग प्यारी।
Source page 89
लँगर लँगरई भुलाने वारी प्यारी।
पिय पियें प्यारी रस पिय रस प्यारी।
पिय प्यारी रस पियें धनि ब्रजनारी।
चूमें पिय तहँ जहँ पद धरें प्यारी।
पिय को अंगुली पै नचाने वारी प्यारी।
पिय आगे अकड़ के चले सखि प्यारी।
अँगुठा दिखाउँ पिय को मैं बल प्यारी।
पिय आगे सखि चलें सखि आगे प्यारी।
पाछे जय पिय की प्रथम जय प्यारी।
पिय पावें रास जब कृपा करें प्यारी।
पिय करें मारा मारी प्यार बाँटें प्यारी।
पिय ना सुनें जो तेरी जाओ ढिंग प्यारी।
नीलो रँग तनु प्यारो नीलो पट प्यारी।
पीलो रँग पट प्यारो पीलो तनु प्यारी।
बड़ो नटखट प्यारो बड़ी भोरी प्यारी।
Source page 90
राधे बिनु पिय आधे पिय बिनु प्यारी।
मेरी प्यारी जू को दूजो रूप बनवारी।
प्यारी चह पिउ सुख, पिउ सुख प्यारी।
प्यारी रटें पिउ पिउ, पिउ रटें प्यारी।
प्यारी कहें प्यारे भजु प्यारे कहें प्यारी।
प्यारी कभू प्यारे बनें प्यारे कभू प्यारी।
पिय पूछें प्यारीजू ते कित गईं प्यारी।
कित गये पिय पिय ते ही पूछें प्यारी।
शुक को पढ़ावें पिय कहु “प्यारी प्यारी”।
“प्यारे” कहु शुक को पढ़ावें प्यारी प्यारी।
ब्रजगोपी शुक को पढ़ावें प्यारे प्यारी।
तोपै वारी विधि हरि हर वारी प्यारी।
विधि हरिहरहॅूँ नचाने वारी प्यारी।
तोपै वारी वारी बड़े बड़े प्यारी प्यारी।
वारी बनवारी अस प्यारी प्यारी प्यारी।
पिय पर सब वारी पिय वारी प्यारी।
तोपै वारी रँगीली महल वारी प्यारी।
Source page 91
मुक्ति ठुकरावें ब्रजवासी तेरे प्यारी।
मुक्ति माँगे गोपीजन पदरज प्यारी।
ब्रजगोपी देना जाने लेना नहिं प्यारी।
कोटि कोटि कमला हैं किंकरि प्यारी।
ब्रह्मा माँगें वर खग मृग तरु प्यारी।
ऊधो माँगें वर तरु लता पता प्यारी।
कर्म ज्ञान योग ते न मिलो तुम प्यारी।
तेरा नाम तो है बड़ तुझते भी प्यारी।
नाम के अधीन रहे नामी तू भी प्यारी।
बुद्धि माने शठ मन माने नहिं प्यारी।
जापै कृपा करें सोई पावें तोहिं प्यारी।
Source page 92
मैं तो सेवा माँगूँ महलन वारी प्यारी।
मैं तो सेवा माँगूँ तव सखियन प्यारी।
ले के मानूँगा मैं प्रेम हठी शिशु प्यारी।
मैं हूँ छत्तिस करु तिरसठ प्यारी।
सुधि लो हमारी सुकुमारी अब प्यारी।
सदा का भिखारी तोहिं कहा दऊँ प्यारी।
हमरिहिं बारी क्यों कठोर भईं प्यारी।
बिगरी बना दे बरसाने वारी प्यारी।
सत्याग्रह करिहौं मैं तेरे द्वार प्यारी।
आजा न तु तेरे द्वार तनु तजौं प्यारी।
कृपा अवतारिणि कृपा करु प्यारी।
मैं तो तेरी थी रहूँगी कृपा करु प्यारी।
अपयश भारी जो न कृपा करु प्यारी।
कहा घटि जाय तोरा कृपा करु प्यारी।
Source page 93
खाली हुआ कहा कृपाकोष तव प्यारी।
