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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 45 · 69/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 45 · Kirtan 45

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

32 source linesपुस्तक पृष्ठ 104–106PDF 125–127

जय जय राधे प्रेम अगाधे,

(ठाकुर युगल किशोर...)

जय जय राधे प्रेम अगाधे,

जय जय ब्रह्म श्याम आराधे।

जय जय अस मम स्वामिनि राधे,

जय जय जिन बिनु हरिहूँ आधे।

जय जय अस मोरी श्री राधे,

जय जय जिन चढ़ाव हरि काँधे।

Source page 105

जय जय अस वृषभानु किशोरी,

जय जय चितचोरहुँ चित चोरी।

जय जय अस वृषभानुदुलारी,

जय जय पग चापत बनवारी।

जय जय अस सरकार हमारी,

जय जय हा हा खात बिहारी।

जय जय अस प्यारी सुकुमारी,

जय जय लखि हरि कह बलिहारी।

जय जय चरण कमल अस प्यारी,

जय जय धर हरि मुकुट उतारी।

जय जय अस चितवनि मम प्यारी,

जय जय निरखि गिरत गिरिधारी।

जय जय अस बरसाने वारी,

जय जय दें हरि मुकुट बुहारी।

जय जय अस महिमा नथवारी,

जय जय हरि भये नर ते नारी।

जय जय चह रति रतिरस बोरी,

जय जय लो “कृपालु” सुधि मोरी।

Source page 106

(ठाकुर युगल किशोर...)

जय जय ऐसी मम ठकुरानी,

जय जय हरिहूँ कर अगवानी।

जय जय अस मोरी ठकुरानी,

जय जय ब्रह्म कीन रसखानी।

जय जय अस “कृपालु” महरानी,

जय जय महिमा हरिहुँ न जानी।

ब्रज रस माधुरी · भाग १069
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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