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बलिहार यशुमति शिशु बलिहार।
शिशु पर कोटिन प्रानन वार।
शिशु आनन्दघन तन बलिहार।
शिशु तनु चिन्मय दिव्य निहार।
शिशु तनु नील वरन रिझवार।
शिशु को किय यशुमति शृंगार।
शिशु लखि कोटि काम दउँ वार।
शिशु लखि विधि हरि हर बलिहार।
शिशु अस्तुति कर वेदहुँ चार।
शिशु तनु चुवत प्रेम रस धार।
शिशु हित आशिष दें ब्रजनार।
शिशु चिरजीवें कह ब्रजनार।
शिशु लखि जोइ सुधि देय बिसार।
शिशु हित देति सखिन उपहार।
शिशु जयकार करें ब्रजनार।
भाल “कृपालु” दिठौना डार॥
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