कीर्तन 151–200
कीर्तन 158 · Kirtan 158
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
सीताराम सीताराम सीताराम, सीताराम सीताराम सीताराम।
सीताराम सीताराम सीताराम, सीताराम सीताराम सीताराम।
पूर्णकाम अभिराम सीताराम, कोटि काम अभिराम सीताराम।
मेरे राम मेरे राम मेरे राम, मेरे राम मेरे राम मेरे राम॥
दशरथ नन्दन श्री राम, त्रिभुवन वंदन श्री राम।
असुर निकंदन राम, जन मन चंदन श्री राम।
जीवन जीवन श्री राम, कौशल्या ललन श्री राम।
सब प्राण प्राण श्री राम, चिदघन सुखघन श्री राम।
जीवों के जीव श्री राम, सुख के भी सुख श्री राम।
श्री राम श्री राम श्री राम, श्री राम श्री राम श्री राम।
जय जय अवध बिहारी राम, जय जय मुनि मनहारी राम।
मेरे नयनाभिराम श्री राम, मेरे नयनाभिराम श्री राम।
मेरे जीवनधन श्री राम, मेरे जीवनधन श्री राम।
जोइ ब्रह्म अरूप अनाम, सोइ दशरथ नंदन राम।
जोइ दशरथ नंदन राम, सोइ नँदनंदन घनश्याम।
Source page 256
मेरे ठाकुर सीताराम, मोहिं देहु प्रेम निष्काम।
