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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 158 · 182/240

कीर्तन 151–200

कीर्तन 158 · Kirtan 158

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

20 source linesपुस्तक पृष्ठ 255–256PDF 276–277

सीताराम सीताराम सीताराम, सीताराम सीताराम सीताराम।

(गोविन्दा गोविन्दा...)

सीताराम सीताराम सीताराम, सीताराम सीताराम सीताराम।

पूर्णकाम अभिराम सीताराम, कोटि काम अभिराम सीताराम।

मेरे राम मेरे राम मेरे राम, मेरे राम मेरे राम मेरे राम॥

दशरथ नन्दन श्री राम, त्रिभुवन वंदन श्री राम।

असुर निकंदन राम, जन मन चंदन श्री राम।

जीवन जीवन श्री राम, कौशल्या ललन श्री राम।

सब प्राण प्राण श्री राम, चिदघन सुखघन श्री राम।

जीवों के जीव श्री राम, सुख के भी सुख श्री राम।

श्री राम श्री राम श्री राम, श्री राम श्री राम श्री राम।

जय जय अवध बिहारी राम, जय जय मुनि मनहारी राम।

मेरे नयनाभिराम श्री राम, मेरे नयनाभिराम श्री राम।

मेरे जीवनधन श्री राम, मेरे जीवनधन श्री राम।

जोइ ब्रह्म अरूप अनाम, सोइ दशरथ नंदन राम।

जोइ दशरथ नंदन राम, सोइ नँदनंदन घनश्याम।

जानकी जीवन श्री राम, प्राण सजीवन राम।

जय जय रघुनंदन राम, जय जय जग वंदन राम।

Source page 256

मेरे ठाकुर सीताराम, मोहिं देहु प्रेम निष्काम।

नहिं चह बैकुण्ठहुँ धाम, चह सेवा सीताराम।

सुखघन “कृपालु” श्री राम, सुख घन तन भी श्री राम।।

ब्रज रस माधुरी · भाग १182
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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