प्रार्थना एवं आरती
प्रार्थना · Prayer
दैनिक प्रार्थना
श्री गुरवे नमः श्री गुरवे नमः श्री गुरवे नमः
आचार्यं मां विजानीयान्नावमन्येत कर्हिचित्।
न मर्त्यबुद्ध्याऽसूयेत सर्वदेवमयो गुरुः॥
हे परम प्रियतम पूर्णतम पुरुषोत्तम श्री कृष्ण! तुम से विमुख
होने के कारण अनादिकाल से हमने अनन्तानन्त दुःख पाये एवं
पा रहे हैं। पाप करते करते अन्तःकरण इतना मलिन हो चुका है
कि रसिकों द्वारा यह जानने पर भी कि तुम अपनी भुजाओं को
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हे अशरण शरण! तुम्हारी कृपा के बिना तुम्हें कोई जान भी तो
नहीं सकता। ऐसी स्थिति में, हे अकारण करु ण! पतितपावन
श्रीकृष्ण! तुम अपनी अहैतुकी कृपा से ही हमको अपना लो।
हे करुणा सागर! हम भुक्ति-मुक्ति आदि कुछ नहीं माँगते, हमें
तो केवल तुम्हारे निष्काम प्रेम की ही एकमात्र चाह है।
हे नाथ! अपने विरद की ओर देखकर इस अधम को निराश न
हे जीवनधन! अब बहुत हो चुका, अब तो तुम्हारे प्रेम के बिना
यह जीवन मृत्यु से भी अधिक भयानक है। अतएव
प्रेमभिक्षां देहि, प्रेमभिक्षां देहि, प्रेमभिक्षां देहि।
साकेत बिहारी श्री राघवेन्द्र सरकार की जय।
