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ब्रज रस माधुरी

PART I · KIRTAN 1 · 25/240

कीर्तन 1–50

कीर्तन 1 · Kirtan 1

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

12 source linesपुस्तक पृष्ठ 29PDF 50

गुरुः कृपालुर्मम शरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

मंगलमपि मंगल करणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

माया मोहजाल हरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

त्रिगुण- त्रिताप - पाप हरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

मायिक भवसागर तरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

कृपया पंचकोश जरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

मायिक पंचक्लेश हरणं, वंदेऽहं सद्गुरु चरणम्।

योगक्षेम वहन करणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

अशरण शरणं गुरु चरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

गोपी प्रेम भाव भरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

राधा कृष्ण-प्रेम भरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

प्रेम याचते नहि तरणं, वंदेऽहं सद्गुरुचरणम्।

ब्रज रस माधुरी · भाग १025
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 1. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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