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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 133 · 141/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 133 · Kirtan 133

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

39 source linesपुस्तक पृष्ठ 331–333PDF 348–350

आली लखु लाली लाल झुलन बहार।

(नीको लागे...)

आली लखु लाली लाल झुलन बहार।

झूला डर्यो कुंज कदमन डार।

चंदन को झूला रिझवार।

झूला की रेशम डोर निहार।

झूला किय फूलन को सिंगार।

चंदन फूलन महक अपार।

झूलन बैठी हैं भानुदुलार।

झूला झुलावत नंदकुमार।

नभ आये बदरा घिरि बलिहार।

घन दामिनि दमकनि रिझवार।

गावति अलि मिलि राग मलार।

बाजत विविध वाद्य बलिहार।

ब्रज नार बोले बलिहार बार बार।

उत लखु लाली को फुलन सिंगार।

फुलन को सिर पर मुकुट निहार।

फुलन की शीश चन्द्रिका धार।

Source page 332

घुँघुरारी वेणिहुँ फुलन सँवार।

कलिन को कानन कुंडल धार।

फुलन को कर कंकन बलिहार।

फुलन की पहुँची छवि छविदार।

फुलन के बाजूबंद भुजन निहार।

कलिन की अंगुरिन मुँदरिन धार।

रंग बिरंगे फुलन को हार।

उर कंचुकि भल फुलन सँवार।

फुलन की कटि किंकिनि रिझवार।

नीली सारिहुँ फुलन सँवार।

कलिन की पग पायल छविदार।

कलिन के बिछुये अँगुरिन धार।

फुलन को लालहुँ किय सिंगार।

फुलन को सब सखि किय सिंगार।

चहुँ दिशि फूली लतन निहार।

झरत फुलन सिर कदमनि डार।

सब अलि मिलि कर जय जयकार।

घन गरजन लागे गगन मझार।

घन गरजन सुनि डरीं सुकुमार।

Source page 333

बैठे तब सँग नंदकुमार।

गरबाहीं डार दोउ सरकार।

झुलवत दोउ “कृपालु” सरकार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २141
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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