कीर्तन 51–100
कीर्तन 75 · Kirtan 75
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भोला भाला कह श्यामा सम श्याम।
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श्यामा जू को हैं सेवक घनश्याम।
श्यामा जू हैं महरानी ग्वार घनश्याम।
श्यामा जू हैं दयामयी निष्ठुर श्याम।
श्यामा जू हैं भोरी भारी नटखट श्याम।
श्यामा जू हैं दाता भिखारी घनश्याम।
श्यामा जू हैं गोरी गोरी कारो श्याम।
श्यामा जू हैं अति प्यारी प्यारो श्याम।
श्यामा जू हैं लज्जामयी निर्लज्ज श्याम।
श्यामा जू हैं सौम्य अति चंचल श्याम।
श्यामा जू हैं डोरी सोँ पतंग सोँ हैं श्याम।
श्यामा जू हैं चातकी मधुकर श्याम।
श्यामा जू हैं स्वर्ण कसौटी श्याम।
श्यामा जू हैं मोहिनि मोहित श्याम।
श्यामा जू हैं आत्मा देह सम श्याम।
श्यामा जू हैं भानुलली द्वै बाप श्याम।
श्यामा जू हैं कीर्ति लली द्वै मात श्याम।
श्यामा जू की हा हा खायँ पुनि पुनि श्याम।
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श्यामा जू के पाछे पाछे चलें नित श्याम।
श्यामा जू को मानें निज साहूकार श्याम।
श्यामा जू को ऋणियाँ मानें आपु श्याम।
श्यामा जू की आज्ञा लै करें रास श्याम।
श्यामा को बुलावो भाजे आवें आपु श्याम।
श्यामा जू के आगे भूले सिट्टी पिट्टी श्याम।
श्यामा जू के भय भयभीत होयँ श्याम।
श्यामा जू की आरती उतारें घनश्याम।
श्यामा जू की जय बोलें बार बार श्याम।
श्यामा जू की डगर बुहारें नित श्याम।
श्यामा धरें पग जहँ तहँ सिर श्याम।
श्यामा नाम पूर्व पाछे सब बोलें श्याम।
श्यामा छवि लखि मुर्छित गिरें श्याम।
श्यामा शक्ति पाके शक्तिमान बने श्याम।
श्यामा शक्ति पाके बने सुखघन श्याम।
श्यामा शक्ति पाके करें सृष्टि कर्म श्याम।
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