कीर्तन 1–50
कीर्तन 28 · Kirtan 28
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
नाथों के नाथ दीनानाथ सो जगन्नाथ।
नाथों के नाथ दीनानाथ सो जगन्नाथ।
Source page 74
विधि हरि हर के भी नाथ हैं जगन्नाथ।
जो हैं अनाथों के नाथ सो जगन्नाथ।
जो बिनु हेतु कृपालु सो जगन्नाथ।
जो हैं प्रणत वत्सल सो जगन्नाथ।
जो हैं सदा भक्त वश सो जगन्नाथ।
जो हैं प्रणत अनुगत सो जगन्नाथ।
जो दिव्य प्रेम रस सिंधु सो जगन्नाथ।
जो हैं परात्पर तत्त्व सो जगन्नाथ।
जो हैं समस्त शक्ति युक्त सो जगन्नाथ।
जो हैं स्वयं भगवान सो जगन्नाथ।
जो अद्वय ज्ञान तत्त्व सो जगन्नाथ।
Source page 75
जो हैं निर्गुण सगुण सो जगन्नाथ।
जो निर्विशेष सविशेष सो जगन्नाथ।
जो हैं अदृष्ट अरु दृष्ट सो जगन्नाथ।
जो अज्ञेय अरु ज्ञेय सो जगन्नाथ।
जो अचिन्त्य अरु चिन्त्य सो जगन्नाथ।
जो अग्राह्य अरु ग्राह्य सो जगन्नाथ।
जो अप्राप्य अरु प्राप्य सो जगन्नाथ।
जो अनिर्वाच्य अरु वाच्य सो जगन्नाथ।
जो सर्वद्रष्टा देव सो जगन्नाथ।
जो पूर्णतम ब्रह्मरूप सो जगन्नाथ।
जो पुरुषोत्तम ब्रह्म सो जगन्नाथ।
जो है षडैश्वर्य पूर्ण सो जगन्नाथ।
