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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 28 · 36/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 28 · Kirtan 28

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

40 source linesपुस्तक पृष्ठ 73–75PDF 90–92

नाथों के नाथ दीनानाथ सो जगन्नाथ।

(मेरे प्राणाधार हैं ...)

नाथों के नाथ दीनानाथ सो जगन्नाथ।

जो हैं जगत के नाथ सो जगन्नाथ।

जिनसे हो उत्पन्न जग सो जगन्नाथ।

जिनसे हो रक्षित जग सो जगन्नाथ।

Source page 74

जिनसे हो जग का लय सो जगन्नाथ।

विधि हरि हर के भी नाथ हैं जगन्नाथ।

जो सब उर पुर बसें सो जगन्नाथ।

जो सब जग व्यापक सो जगन्नाथ।

जो हैं अनाथों के नाथ सो जगन्नाथ।

जो हैं पतित पावन सो जगन्नाथ।

जो बिनु हेतु कृपालु सो जगन्नाथ।

जो हैं प्रणत वत्सल सो जगन्नाथ।

जो हैं सदा भक्त वश सो जगन्नाथ।

जो हैं प्रणत अनुगत सो जगन्नाथ।

जो हैं दीनन बंधु सो जगन्नाथ।

जो दिव्य प्रेम रस सिंधु सो जगन्नाथ।

जो आत्मा की आत्मा सो जगन्नाथ।

जो हैं परात्पर तत्त्व सो जगन्नाथ।

जो हैं समस्त शक्ति युक्त सो जगन्नाथ।

जो हैं स्वयं भगवान सो जगन्नाथ।

जो अद्वय ज्ञान तत्त्व सो जगन्नाथ।

जो सर्वज्ञ सर्ववित सो जगन्नाथ।

जो जग के नियामक सो जगन्नाथ।

Source page 75

जो निराकार साकार सो जगन्नाथ।

जो हैं निर्गुण सगुण सो जगन्नाथ।

जो निर्विशेष सविशेष सो जगन्नाथ।

जो हैं अदृष्ट अरु दृष्ट सो जगन्नाथ।

जो अज्ञेय अरु ज्ञेय सो जगन्नाथ।

जो अचिन्त्य अरु चिन्त्य सो जगन्नाथ।

जो अग्राह्य अरु ग्राह्य सो जगन्नाथ।

जो अप्राप्य अरु प्राप्य सो जगन्नाथ।

जो अनिर्वाच्य अरु वाच्य सो जगन्नाथ।

जो सर्वद्रष्टा देव सो जगन्नाथ।

जो पूर्णतम ब्रह्मरूप सो जगन्नाथ।

जो पुरुषोत्तम ब्रह्म सो जगन्नाथ।

जो है षडैश्वर्य पूर्ण सो जगन्नाथ।

जो है प्रणत जन वश्य सो जगन्नाथ।

जो पतितन पावन सो जगन्नाथ।

जो हैं “कृपालु” के भी नाथ सो जगन्नाथ॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २036
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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