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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 83 · 91/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 83 · Kirtan 83

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

45 source linesपुस्तक पृष्ठ 206–208PDF 223–225

आजु कान्ह को नीँद न आय।

(नीको लागे...)

आजु कान्ह को नीँद न आय।

याते कान्ह बुलायो माय।

मो ढिंग बैठो कह बलभाय।

कोउ कहानी माय सुनाय।

कहौं कहानी सुनु कह माय।

हुंकारी भरियो बलभाय।

अवधपुरी में थे इक राय।

दशरथ नाम पुरानन गाय।

दसहूँ दिशि उनको रथ जाय।

उनकी नारी तीन बताय।

इक कौशल्या नाम बताय।

इक कैकेयी नाम बताय।

इक सुमित्रा नाम बताय।

बड़ी नारि कौशल्या आय।

दशरथ पुत्र चार बतलाय।

ज्येष्ठ पुत्र तो राम कहाय।

Source page 207

उनको श्रुति भगवान बताय।

एक पुत्र लक्ष्मण कहलाय।

एक पुत्र को भरत बताय।

एक शत्रुहन नाम बताय।

राम नारि सीता कहलाय।

सोऊ ब्रह्म रूप बतलाय।

कैकेयी सौतेली माय।

रामहिं दिय तिन विपिन पठाय।

चौदह बरस बसे वन जाय।

सीता राम लखन वन जाय।

बन महँ असुर दशानन आय।

सीता को लै गयो उड़ाय।

मग महँ मिल्यो जटायू आय।

वाको रावण मारि गिराय।

सीता कह हा राम बचाय।

यह सुनि उठि बैठे बलभाय।

कह लक्ष्मण लक्ष्मण धनु लाय।

मानहु क्रोध रूप धरि आय।

दृश्य देखि यह डरि गई माय।

Source page 208

गूढ़ मरम नहिं समुझी माय।

जाने साधारण सुत माय।

पकरी माय धाय बलभाय।

लै गोदिहिं पुनि पुनि दुलराय।

लिय छुपाय आँचल बलभाय।

नाम जपति नारायण माय।

जान न नारायण बलभाय।

नींद आय बलभाय सुलाय।

राम “कृपालु” माय बलभाय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २091
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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