कीर्तन 51–100
कीर्तन 52 · Kirtan 52
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
प्यारी प्यारी सुकुमार, भोरी भारी सरकार।
प्यारी प्यारी सुकुमार, भोरी भारी सरकार।
हैं कृपा रूप साकार, सोइ मम वृषभानु दुलार॥
जेहि कहति ब्रह्म श्रुति चार, सोइ अलबेली सरकार।
जो प्रेम रूप रस सार, सोइ मम वृषभानु दुलार॥
जेहि चाकर नंदकुमार, जेहि रिझवत नित रिझवार।
बनि मालिनि योगिनि नार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥
पग चापत नंदकुमार, पुनि पुनि कर जय जयकार।
लखि लालिहिं कह बलिहार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥
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सत चित सुख घन तन धार, तनु दामिनि दुति अनुहार।
जो किय सोरह शृंगार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥
सँग रह लख लख ब्रज नार, कर नित नव नव शृंगार।
देखत नित युगल विहार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥
आज्ञा लै भानुदुलार, धरि मुकुट चरण सरकार।
कर सरस रास रिझवार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥
धरि अगनित तनु रिझवार, नहिं पायो प्यारिहिं पार।
याचत पद रज सुकुमार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥
