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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 52 · 60/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 52 · Kirtan 52

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

21 source linesपुस्तक पृष्ठ 136–137PDF 153–154

प्यारी प्यारी सुकुमार, भोरी भारी सरकार।

(हैं बाँको सुन्दर...)

प्यारी प्यारी सुकुमार, भोरी भारी सरकार।

हैं कृपा रूप साकार, सोइ मम वृषभानु दुलार॥

जेहि कहति ब्रह्म श्रुति चार, सोइ अलबेली सरकार।

जो प्रेम रूप रस सार, सोइ मम वृषभानु दुलार॥

जेहि चाकर नंदकुमार, जेहि रिझवत नित रिझवार।

बनि मालिनि योगिनि नार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥

पग चापत नंदकुमार, पुनि पुनि कर जय जयकार।

लखि लालिहिं कह बलिहार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥

हैं दीनबन्धु सरकार, पतितन अपनावनि हार।

जेहि डर डर नंदकुमार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥

Source page 137

सत चित सुख घन तन धार, तनु दामिनि दुति अनुहार।

जो किय सोरह शृंगार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥

सँग रह लख लख ब्रज नार, कर नित नव नव शृंगार।

देखत नित युगल विहार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥

आज्ञा लै भानुदुलार, धरि मुकुट चरण सरकार।

कर सरस रास रिझवार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥

धरि अगनित तनु रिझवार, नहिं पायो प्यारिहिं पार।

याचत पद रज सुकुमार, सोइ मम वृषभानुदुलार॥

राधा “रा” सुनि रिझवार, भाजत तहँ नंदकुमार।

राधा पर सर्वस वार, सोइ मम “कृपालु” सरकार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २060
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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