कीर्तन 101–134
कीर्तन 113 · Kirtan 113
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मैंने जाना नहिं तू ही मेरा पिय रसिया।
मैंने जाना नहिं तू ही मेरा पिय रसिया।
तू तो जानता था मैं हूँ तेरी पिय रसिया।
मोहिं तो भुलाया तेरी माया ने रसिया।
यामें दोष मेरा कहा है बता दे रसिया।
तेरी माया को न जीता कोउ जग रसिया।
तेरी शक्ति पाके माया तेरे सम रसिया।
तेरी कृपा बिनु माया नहिं जाय रसिया।
तेरी माया ने भुलाया मम रूप रसिया।
तेरी माया ने कराया पुण्य पाप रसिया।
माया ने घुमाया लख चौरासी रसिया।
तुम भी घूमें मेरे साथ उर बसि रसिया।
मेरे पुण्य पाप लिखे तूने नित रसिया।
किन्तु रोका नहिं कभू मोहिँ तूने रसिया।
मेरे भाग्य कर्म भुगवाये तूने रसिया।
Source page 284
किंतु मैंने सब में ही देखा दोष रसिया।
शास्त्र वेद पढ़े सुने बार बार रसिया।
सत्य क्या असत्य क्या है यह जाना रसिया।
किंतु माना नहिं किया मनमाना रसिया।
तेरी माया का न पाया पार कोउ रसिया।
तेरी माया ने भुलाया विधि बुधि रसिया।
तेरी माया ने भुलाया हरि को भी रसिया।
तेरी माया ने भुलाया शिव को भी रसिया।
तेरी माया ने भुलाया रमा को भी रसिया।
तेरी माया ने भुलाया उमा को भी रसिया।
माया ने भुलाया सरस्वती को भी रसिया।
माया ने भुलाया सनकादि को भी रसिया।
माया ने भुलाया नारद को भी रसिया।
माया ने भुलाया ब्रह्मलीन को भी रसिया।
माया ने भुलाया योगारूढ़ को भी रसिया।
माया ने भुलाया विश्वामित्र को भी रसिया।
माया ने भुलाया पराशर को भी रसिया।
Source page 285
माया ने भुलाया बड़े बड़े तपी रसिया।
माया ने भुलाया कामदेव को भी रसिया।
