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पुस्तक परिचय · About the book
प्रकाशकीय
ब्रजरस रसिक जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, रसिक
शिरोमणि, रसरूप श्यामसुन्दर एवं रससिन्धु रासेश्वरी श्री राधारानी
की रसमयी लीलाओं का रसास्वादन साधारण जीवों को भी
कराने के लिये सदैव आतुर रहते हैं। दिव्य उन्माद की अवस्था
में वे रसिक और रसरूप दोनों ही प्रतीत होते हैं। साथ ही यह भी
अनुभूति होती है कि वह जीवों को बरबस ब्रजरस वितरित
करना चाहते हैं। उनके श्री मुख से निःसृत संकीर्तन ब्रजरस ही
“ब्रजरस माधुरी” में समस्त संकीर्तन संकलित किये गये
