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ब्रज रस माधुरी

PART II · Front matter · 4/142

प्रारम्भिक पृष्ठ

पुस्तक परिचय · About the book

14 source linesप्रारम्भिक पृष्ठPDF 4

प्रकाशकीय

ब्रजरस रसिक जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, रसिक

शिरोमणि, रसरूप श्यामसुन्दर एवं रससिन्धु रासेश्वरी श्री राधारानी

की रसमयी लीलाओं का रसास्वादन साधारण जीवों को भी

कराने के लिये सदैव आतुर रहते हैं। दिव्य उन्माद की अवस्था

में वे रसिक और रसरूप दोनों ही प्रतीत होते हैं। साथ ही यह भी

अनुभूति होती है कि वह जीवों को बरबस ब्रजरस वितरित

करना चाहते हैं। उनके श्री मुख से निःसृत संकीर्तन ब्रजरस ही

है, पीने वाला होना चाहिये।

“ब्रजरस माधुरी” में समस्त संकीर्तन संकलित किये गये

हैं। यह पुस्तक तीन भागों में प्रकाशित की गई है।

राधा गोविंद समिति

चतुर्थ संस्करणः

7 जुलाई, 2009

ब्रज रस माधुरी · भाग २004
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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