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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 3 · 11/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 3 · Kirtan 3

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

52 source linesपुस्तक पृष्ठ 5–8PDF 22–25

बलिहारी है तिहारी गुरु बलिहारी।

(नथवारी रंगीली...)

बलिहारी है तिहारी गुरु बलिहारी।

तो पै तन मन धन प्रानन वारी।

तू तो है इक रूप ब्रह्म बनवारी।

तेरे भक्त ही हैं साँचे भक्त बनवारी।

तेरी भक्ति बिनु मिले नहिँ बनवारी।

Source page 6

तेरी भक्ति से प्रसन्न होवेँ बनवारी।

तेरे भक्त की भी भक्ति करें बनवारी।

तू है पतितन भक्तन बनवारी।

तू ही तत्व बतावे कौन बनवारी।

तू ही पुनि करवावे भक्ति बनवारी।

तू ही करे दान दिव्य प्रेम बनवारी।

तो को माने प्राण ते अधिक बनवारी।

तेरे पाछे पाछे डोलें ब्रह्म बनवारी।

तेरे हाथ बिके बिनु दाम बनवारी।

तेरी पद रज आँजें तनु बनवारी।

तेरी रक्षा करें आठोँ याम बनवारी।

तेरे जैसा विधि नहिँ प्रिय बनवारी।

तेरे जैसा शिव नहिँ प्रिय बनवारी।

तेरे जैसा दाऊ नहिँ प्रिय बनवारी।

तेरे जैसी पद्मा न प्रिय बनवारी।

तेरे जैसी आत्मा न प्रिय बनवारी।

तू है डोरी सोँ पतंग सोँ हैं बनवारी।

तेरी रुचि में ही रुचि राखेँ बनवारी।

तेरा पतन न होने देयँ बनवारी।

Source page 7

तेरे आगे भूलेँ भगवत्ता बनवारी।

तू जैसा भी नचावे नाचें बनवारी।

तेरा क्रीतदास बनि जायँ बनवारी।

तेरी भक्ति करें भक्त बनि बनवारी।

तोहिँ बिनु माँगे मुक्ति देयँ बनवारी।

तोहिँ त्रिगुण अतीत करें बनवारी।

तोहिँ तीनों कर्म मुक्त करेँ बनवारी।

तेरे सब पाप पुण्य नासेँ बनवारी।

तेरे तीनों ताप आप नासेँ बनवारी।

तेरे पंचक्लेश नष्ट करेँ बनवारी।

तेरे पंचकोश भस्म करेँ बनवारी।

तेरी दोनों माया को भगावें बनवारी।

तेरे काम को बनावें प्रेम बनवारी।

तेरे कृपा पात्र पावेँ कृपा बनवारी।

तेरी कृपा पावे ज्ञानी प्रेम बनवारी।

तू है विधि हरि हर तू है बनवारी।

तोहिँ पावे जा पै कृपा करेँ बनवारी।

तोहिँ जाने सो जनावे जेहि बनवारी।

तेरी सेवा माने निज सेवा बनवारी।

Source page 8

तेरी नीच टहल बलि बनवारी।

तेरे सुख में ही सुख मानें बनवारी।

तेरे सर्व कर्म करें आपु बनवारी।

तेरे प्रिय के परम प्रिय बनवारी।

तेरे प्रेम के पुजारी बने बनवारी।

तेरे दिये पत्र पुष्प खायँ बनवारी।

तेरी भक्ति आगे शक्ति भूलेँ बनवारी।

तेरी कृपा ते “कृपालु” पावेँ बनवारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २011
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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