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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 90 · 98/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 90 · Kirtan 90

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

43 source linesपुस्तक पृष्ठ 226–228PDF 243–245

होड़ परी राम श्याम दोउ भाय।

(नीको लागे...)

होड़ परी राम श्याम दोउ भाय।

दोउ परस्पर रह बतराय।

कहत परस्पर दोउ तुतुराय।

हम लोइ पापा हैं नंदराय।

यशुमति तो हैं हमलोइ माय।

हम लोइ हमलोइ कह दोउ भाय।

आये दोउ ढिंग बाबा माय।

इक सँग राम श्याम दोउ भाय।

कबहुँक बाबा गोदिहिं जाय।

कबहुँ धाय जायँ गोदिहिं माय।

इमि भइ बेर लरत दोउ भाय।

असमंजस महँ बाबा माय।

इक दूजे कहँ लख मुसकाय।

तब कह दोउन बाबा माय।

दोउन के हम बाबा माय।

नहिं माने कैसेहुँ दोउ भाय।

Source page 227

पुनि पुनि चढ़े गोद दोउ भाय।

पुनि बोले दोउ बाबा माय।

सुनो सुनो मेरी दोउ भाय।

हम हैं वाके बाबा माय।

दृगन मूँदि जो नाचे गाय।

नाचन लगे सँग दोउ भाय।

गायें आँय वाँय दोउ भाय।

बलि बलि जाय लखि बाबा माय।

पुनि गये छुपि बाबा अरु माय।

नाचि नाचि थकि गये दोउ भाय।

तब दृग खोलि लख्यो दोउ भाय।

भये प्रकट उत बाबा माय।

कह सुनु राम श्याम दोउ भाय।

जो कर सेवा बाबा माय।

वाही को है बाबा माय।

हौँ हौँ हौँ हौँ कह दोउ भाय।

आगे सुनु कह बाबा माय।

सेवा लेहु बाँटि दोउ भाय।

पुनि सँग लरन लगे दोउ भाय।

Source page 228

यह हौं यह हौं कह दोउ भाय।

सेवा बाँटि न सके दोउ भाय।

सुनु निर्णय कह बाबा माय।

इक दिन राम करे सेवकाय।

इक दिन सेवा कर बलभाय।

प्रथम राम सेवा को आय।

पुनि “कृपालु” आवें बलभाय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २098
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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