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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 74 · 82/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 74 · Kirtan 74

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

157 source linesपुस्तक पृष्ठ 183–191PDF 200–208

दोउ प्राणवल्लभ प्राणनाथ श्यामा श्याम।

(मेरे प्राणाधार हैं...)

दोउ प्राणवल्लभ प्राणनाथ श्यामा श्याम।

दोउ सत चित आनंद घन श्यामा श्याम।

दोउ दिव्य आनंद घन तन श्यामा श्याम।

दोउ नित्य रास करें वृंदावन श्यामा श्याम।

दोउ सेवक दोउ सेव्य दोउ श्यामा श्याम।

दोउ एक तत्व नाम रूप भिन्न श्यामा श्याम।

दोउ आत्मा है एक तनु भिन्न श्यामा श्याम।

दोउ ज्ञान भी है एक तनु भिन्न श्यामा श्याम।

दोउ बुद्धि भी एक तनु भिन्न श्यामा श्याम।

दोउ मन भी है एक तनु भिन्न श्यामा श्याम।

Source page 184

दोउ है स्वभाव भिन्न अचरज श्यामा श्याम।

दोउ झगरत नित अचरज श्यामा श्याम।

दोउ परतत्व पूर्णब्रह्मरूप श्यामा श्याम।

दोउ अवतारी स्वयं भगवान श्यामा श्याम।

दोउ आवें जग एक कल्प महँ श्यामा श्याम।

दोउ सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान श्यामा श्याम।

दोउ सृष्टि के निमित्त कारण श्यामा श्याम।

दोउ सृष्टि उपादान कारण श्यामा श्याम।

दोउ सृष्टि पालक रक्षक श्यामा श्याम।

दोउ सृष्टि के प्रलय कारक श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं अधम उधारन श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं पतितन पतवार श्यामा श्याम।

दोउ पतितन हित कसें फेंट श्यामा श्याम।

दोउ हैं अकिंचन सर्वस्व श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं निर्बल के बल श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं निराधार आधार श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं दीनबंधु दीनानाथ श्यामा श्याम।

दोउ करुणा वरुणालय श्यामा श्याम।

दोउ भाजें जन क्रंदन सुनि श्यामा श्याम।

Source page 185

दोउ ही हैं सहज सनेही श्यामा श्याम।

दोउ हैं प्रपन्नजन रक्षक श्यामा श्याम।

दोउ भक्तवत्सल भक्तवश्य श्यामा श्याम।

दोउ चलें भक्तों के पाछे पाछे श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं निज भक्त के भक्त श्यामा श्याम।

दोउ भक्त हाथ बिके बिनु दाम श्यामा श्याम।

दोउ रह नित्य प्रेम परवश श्यामा श्याम।

दोउ वाके वश जाके सरवस श्यामा श्याम।

दोउ चह शुद्ध प्रेम अश्रुधार श्यामा श्याम।

दोउ अति प्रिय प्रेम निष्काम श्यामा श्याम।

दोउ परखत हो प्रपन्न जीव श्यामा श्याम।

दोउ चह केवल मन बुधि श्यामा श्याम।

दोउ कह अति प्रिय भक्त भक्त श्यामा श्याम।

दोउ प्राण भक्त भक्त प्राण दोउ श्यामा श्याम।

दोउ कह मेरा भक्त मेरा रूप श्यामा श्याम।

दोउ कह मेरा भक्त मेरा गुरु श्यामा श्याम।

दोउ कह रमा से भी प्रिय भक्त श्यामा श्याम।

दोउ कह ब्रह्मा से भी प्रिय भक्त श्यामा श्याम।

दोउ कह शंभु से भी प्रिय भक्त श्यामा श्याम।

Source page 186

दोउ कह दाऊ से भी प्रिय भक्त श्यामा श्याम।

दोउ कह प्राण से भी प्रिय भक्त श्यामा श्याम।

दोउ मूर्तिमान दिव्य ब्रजरस श्यामा श्याम।

दोउ आनंदकंद ब्रज चंद श्यामा श्याम।

दोउ स्वामी सखा सुत प्रियतम श्यामा श्याम।

दोउ करें होड़ कृपा में नित श्यामा श्याम।

दोउ नासें प्रणत के पाप पुण्य श्यामा श्याम।

दोउ सब जीव उर कर्म लिखें श्यामा श्याम।

दोउ सब जीव उर साक्षी श्यामा श्याम।

दोउ पाप पुण्य कर्मफल देयँ श्यामा श्याम।

दोउ रह नित्य नाम आधीन श्यामा श्याम।

दोउ करें नित्य बिहार ब्रज श्यामा श्याम।

दोउ हैं जगत के ईश्वर श्यामा श्याम।

दोउ हैं चराचर माता पिता श्यामा श्याम।

दोउ प्रेम रूप रस सुखधाम श्यामा श्याम।

दोउ नयनाभिराम पूर्णकाम श्यामा श्याम।

दोउ अनुपम दोउ सम दोउ श्यामा श्याम।

दोउ श्यामा श्याम रस सम रस श्यामा श्याम।

दोउ श्यामा श्याम छवि सम छवि श्यामा श्याम।

Source page 187

दोउ श्यामा श्याम प्रेम सम प्रेम श्यामा श्याम।

दोउ एकमात्र अद्वितीय ब्रह्म श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं सुख के भी सुख रूप श्यामा श्याम।

दोउ हैं रसिक दोउ रसनिधि श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं रसिक मुकुटमणि श्यामा श्याम।

दोउ हैं चकोर दोउ मुखचन्द्र श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं रसिकन रिझवार श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं रसिकन जीवन श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं गोपीजन वल्लभ श्यामा श्याम।

दोउ ब्रज युवतिन अंजन श्यामा श्याम।

दोउ ब्रज रस चुवे रोम रोम श्यामा श्याम।

दोउ ब्रह्मलीनजन मोहे मन श्यामा श्याम।

दोउ रूप निज निज मन मोहे श्यामा श्याम।

दोउ रूप माधुर्य नव नव श्यामा श्याम।

दोउ रस क्षण क्षण वर्धमान श्यामा श्याम।

दोउ कोटि कोटि काम कमनीय श्यामा श्याम।

दोउ चह दोउ सेवा आठों याम श्यामा श्याम।

दोउ राखें दोउ रुचि महँ रुचि श्यामा श्याम।

दोउ चह दोउ सुख आठों याम श्यामा श्याम।

Source page 188

दोउ चेतन अरु नित्य सुख श्यामा श्याम।

दोउ हैं अनंत गुणगण धाम श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं गोलोक अधिपति श्यामा श्याम।

दोउ सर्वकारण कारण श्यामा श्याम।

दोउ सर्वभूत आश्रयतत्व श्यामा श्याम।

दोउ सत्यसंकल्प सत्यकाम श्यामा श्याम।

दोउ नासें विद्या अविद्या भी श्यामा श्याम।

दोउ भक्त के त्रिताप हरें आपु श्यामा श्याम।

दोउ भक्त पंचकोश भस्म करें श्यामा श्याम।

दोउ भक्त पंचक्लेश मुक्त करें श्यामा श्याम।

दोउ भक्त को त्रिकर्म मुक्त करें श्यामा श्याम।

दोउ भक्त को द्वन्द्वातीत करें श्यामा श्याम।

दोउ भक्त को दें निज ज्ञानानंद श्यामा श्याम।

दोउ भक्त योगक्षेम वहन करें श्यामा श्याम।

दोउ भक्त को दें बिनु माँगे मुक्ति श्यामा श्याम।

दोउ भक्त पद रज धारें तनु श्यामा श्याम।

दोउ कह भक्त का पतन नहिं श्यामा श्याम।

दोउ चह एक अनन्य प्रेम श्यामा श्याम।

दोउ चह सर्वभाव भजु नित श्यामा श्याम।

Source page 189

दोउ कह सर्वधर्म तजु भजु श्यामा श्याम।

दोउ चह कपट रहित उर श्यामा श्याम।

दोउ वृंदारकवृंदवंद्य श्यामा श्याम।

दोउ वेद वेदांत वेद्य ब्रह्म श्यामा श्याम।

दोउ श्रुति स्मृति प्रतिपाद्य ब्रह्म श्यामा श्याम।

दोउ वेदशास्त्र मृग्यमान ब्रह्म श्यामा श्याम।

दोउ श्रुति ऋचन अगोचर श्यामा श्याम।

दोउ वेद कृत वेदतत्त्ववित् श्यामा श्याम।

दोउ इन्द्रिय मन बुधि पर श्यामा श्याम।

दोउ महँ देही देह भेद नहिं श्यामा श्याम।

दोउ सब आत्मा की आत्मा हैं श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं स्वांश के भी अंशी श्यामा श्याम।

दोउ हैं विभिन्नांश अंशी श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं अद्वयज्ञानतत्व श्यामा श्याम।

दोउ रोम रोम कोटि ब्रह्माण्ड श्यामा श्याम।

दोउ सम नहिं कोउ अधिक न श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं जीव माया शासक श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं ब्रह्म की प्रतिष्ठा भी श्यामा श्याम।

दोउ ही हैं ब्रह्म निराकार योनि श्यामा श्याम।

Source page 190

दोउ दो विरोधी धर्म अधिष्ठान श्यामा श्याम।

दोउ मायाधीश योगमायाधीश श्यामा श्याम।

दोउ विश्वरूप विश्वपर भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ निर्विशेष दोउ सविशेष श्यामा श्याम।

दोउ बहुरूप एक रूप भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ हैं सगुण दोउ निर्गुण श्यामा श्याम।

दोउ जग में भी गोलोक में भी श्यामा श्याम।

दोउ अति लिप्त निर्लिप्त भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ सविकल्प निर्विकल्प भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ महायोगी महाभोगी हैं श्यामा श्याम।

दोउ भक्त हित अतिकोमल श्यामा श्याम।

दोउ हैं विमुख हित बज्र जनु श्यामा श्याम।

दोउ सर्वकर्ता अकर्ता भी श्यामा श्याम।

दोउ परिच्छिन्न भी हैं विभु भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ सापेक्ष निरपेक्ष भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ हैं सकाम निष्काम भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ हैं स्वतंत्र परतंत्र भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ हैं विभक्त अविभक्त भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ दृष्टि दृश्य भी अदृश्य भी हैं श्यामा श्याम।

Source page 191

दोउ हैं अजन्मा जन्मा भी श्यामा श्याम।

दोउ अति भोरे अति चतुर भी श्यामा श्याम।

दोउ अति दीन भी अदीन भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ प्राप्य दोउ अप्राप्य भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ हैं अचिन्त्य दोउ चिन्त्य भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ अज्ञेय दोउ ज्ञेय भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ निराकार दोउ साकार श्यामा श्याम।

दोउ अणु ते हैं अणु विभु भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ हैं अकाय दिव्यकाय युक्त श्यामा श्याम।

दोउ अति वीर अति भीरु भी हैं श्यामा श्याम।

दोउ नरवपु में भी व्यापक श्यामा श्याम।

दोउ नररूप लीलाधारी श्यामा श्याम।

दोउ हैं “कृपालु” अति कृपासिंधु श्यामा श्याम॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २082
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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