कीर्तन 1–50
कीर्तन 49 · Kirtan 49
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तू ही तू ही तू ही तो है मेरी एक राधारानी,
तू ही तू ही तू ही तो है मेरी एक राधारानी,
मैं भी मैं भी मैं भी तो हूँ इक तेरी राधारानी।
तू ही मेरी तू ही मेरी स्वामिनि राधारानी,
तू ही मेरी तू ही मेरी जीवनि राधारानी।
तू तो है कृपा की मूरति मेरी राधारानी,
लाजे लखि रति सूरति तेरी राधारानी।
Source page 129
तेरी कृपा ते ही कोउ तोहिं पावे राधारानी,
तेरी कृपा ते ही ब्रजरस पावे राधारानी।
तेरी कृपा ते ही विधि रचे जग राधारानी,
तेरी कृपा ते ही हरि पाले जग राधारानी।
तेरी कृपा ते ही शिव करें लय राधारानी,
तेरी कृपा ते ही श्याम पावें रास राधारानी।
तेरी कृपा ते ही जियें जीव सब राधारानी,
तेरी कृपा ते ही हो प्रपन्न कोउ राधारानी।
तेरी कृपा ते ही पायो ब्रह्म तनु राधारानी,
तेरी कृपा ते ही ब्रह्म लीला धारी राधारानी।
तेरी कृपा ते ही कोउ भजे तोहिं राधारानी,
तेरी कृपा ते ही मन तजे जग राधारानी।
तेरी कृपा ते ही कोउ बोले मेरी राधारानी,
तेरी कृपा ते ही कोउ बने तेरी राधारानी।
मैं तो हूँ पतित अति सुत तेरा राधारानी,
तू तो माँ पतितपावनि मेरी राधारानी।
मेरा मन विषयों का मधुकर राधारानी,
Source page 130
तेरे सोचने से ही मैं बनूँ तेरी राधारानी।
माया तो है तेरी शक्ति तेरी दासी राधारानी,
सुत को बचा ले माया को भगा दे राधारानी।
तेरी माया ने सताया अतिशय राधारानी,
निज सुत को छुपा ले आँचल राधारानी।
तूने तो तजा न मोहिँ इक पल राधारानी,
मैंने ही भुलाया माया वश तोहिँ राधारानी।
स्वांग बना के लख चौरासी राधारानी,
चाहा मैं रिझाना तोहिँ रीझी नहिँ राधारानी।
अब तो लगा ले उर मोहिं मेरी राधारानी,
बड़ी आशा लै के आई तेरे ब्रज राधारानी।
मोहूँ को बना ले निज दासी दासी राधारानी,
तू तो बिनु हेतु सनेहिनि राधारानी,
बिनु साधन अपना ले मोहिं राधारानी।
जीना नहिं चाहूँ अब तेरे बिनु राधारानी,
तेरे बिनु जीना कोई जीना नहिं राधारानी।
