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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 49 · 57/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 49 · Kirtan 49

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

47 source linesपुस्तक पृष्ठ 128–130PDF 145–147

तू ही तू ही तू ही तो है मेरी एक राधारानी,

(तू ही तू ही...)

तू ही तू ही तू ही तो है मेरी एक राधारानी,

मैं भी मैं भी मैं भी तो हूँ इक तेरी राधारानी।

तू ही मेरी तू ही मेरी स्वामिनि राधारानी,

तू ही मेरी तू ही मेरी जीवनि राधारानी।

तू तो है कृपा की मूरति मेरी राधारानी,

लाजे लखि रति सूरति तेरी राधारानी।

तेरी कृपा ते ही कोउ जाने तोहिं राधारानी,

तेरी कृपा ते ही कोउ माने तोहिं राधारानी।

Source page 129

तेरी कृपा ते ही कोउ तोहिं पावे राधारानी,

तेरी कृपा ते ही ब्रजरस पावे राधारानी।

तेरी कृपा ते ही विधि रचे जग राधारानी,

तेरी कृपा ते ही हरि पाले जग राधारानी।

तेरी कृपा ते ही शिव करें लय राधारानी,

तेरी कृपा ते ही श्याम पावें रास राधारानी।

तेरी कृपा ते ही जियें जीव सब राधारानी,

तेरी कृपा ते ही हो प्रपन्न कोउ राधारानी।

तेरी कृपा ते ही पायो ब्रह्म तनु राधारानी,

तेरी कृपा ते ही ब्रह्म लीला धारी राधारानी।

तेरी कृपा ते ही कोउ भजे तोहिं राधारानी,

तेरी कृपा ते ही मन तजे जग राधारानी।

तेरी कृपा ते ही कोउ बोले मेरी राधारानी,

तेरी कृपा ते ही कोउ बने तेरी राधारानी।

मैं तो हूँ पतित अति सुत तेरा राधारानी,

तू तो माँ पतितपावनि मेरी राधारानी।

मेरा मन विषयों का मधुकर राधारानी,

तू बना ले निज पद मधुकर राधा रानी।

तू तो सत्यसंकल्प माँ है मेरी राधारानी,

Source page 130

तेरे सोचने से ही मैं बनूँ तेरी राधारानी।

माया तो है तेरी शक्ति तेरी दासी राधारानी,

सुत को बचा ले माया को भगा दे राधारानी।

तेरी माया ने सताया अतिशय राधारानी,

निज सुत को छुपा ले आँचल राधारानी।

तूने तो तजा न मोहिँ इक पल राधारानी,

मैंने ही भुलाया माया वश तोहिँ राधारानी।

स्वांग बना के लख चौरासी राधारानी,

चाहा मैं रिझाना तोहिँ रीझी नहिँ राधारानी।

अब तो लगा ले उर मोहिं मेरी राधारानी,

बड़ी आशा लै के आई तेरे ब्रज राधारानी।

मोहूँ को बना ले निज दासी दासी राधारानी,

भटकत भटकत थकि गये राधारानी।

तू तो बिनु हेतु सनेहिनि राधारानी,

बिनु साधन अपना ले मोहिं राधारानी।

जीना नहिं चाहूँ अब तेरे बिनु राधारानी,

तेरे बिनु जीना कोई जीना नहिं राधारानी।

चाहे अपनाये चाहे ठुकराये राधारानी,

अब तो “कृपालु” पाछा छोड़े नहिं राधारानी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २057
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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