कीर्तन 51–100
कीर्तन 93 · Kirtan 93
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ओरे जादूगर श्याम तू बड़ोई जादूगर।
ओरे जादूगर श्याम तू बड़ोई जादूगर।
तेरा रोम रोम जादू की पिटारी नटवर।
तूने लूटे जादू करि बड़ों बड़ों के भी घर।
तूने लूटे परिकर विधि हरि हर घर।
तूने लूटे उमा रमा सरस्वती के भी घर।
तूने लूटे शुद्ध बुद्ध माया मुक्त जन घर।
तूने लूटे परिकर ब्रज नारिन घर।
तूने लूटे निज जन ब्रज वासिन घर।
Source page 234
तूने लूटे बड़े बड़े नित्यसिद्ध जन घर।
तूने लूटे सिद्ध जीवन्मुक्त जन घर।
तूने लूटे बड़े बड़े ब्रज रसिकन घर।
तूने लूटे बड़े बड़े जगद्गुरुओं के घर।
तूने लूटे निष्काम प्रेम युक्त जन घर।
तूने लूटे दास्य आदि चार भाव वारे घर।
तूने लूटे जो बने हैं तेरे उनहिँन घर।
तूने लूटे बड़े बड़े राक्षस जन घर।
तूने लूटे बड़े बड़े वैष्णवजन घर।
तूने लूटे सब विधि दीन हीन जन घर।
तूने लूटे जो अकिंचन जन तिन घर।
तूने लूटे काम युक्त प्रेम युक्त जन घर।
तूने लूटे विधि हरि हर पद कामी घर।
तूने लूटे इन्द्र आदि पद कामी भक्त घर।
तूने लूटे अणिमादि सिद्धि कामी भक्त घर।
Source page 235
तूने लूटे तीनों कर्म घुसि जन उर घर।
तूने लूटे तीनों गुण घुसि जन उर घर।
तूने लूटे पंचक्लेश घुसि जन उर घर।
तूने लूटे पंचकोश घुसि जन उर घर।
तूने लूटे इन्द्रिय विषयन उर घर।
तूने लूटे तीनों ताप घुसि जन उर घर।
तूने लूटे दोनों राग द्वेष घुसि उर घर।
तूने लूटे जिन उन ने भी लूटा तेरा घर।
