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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 93 · 101/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 93 · Kirtan 93

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

42 source linesपुस्तक पृष्ठ 233–235PDF 250–252

ओरे जादूगर श्याम तू बड़ोई जादूगर।

(नथवारी रंगीली...)

ओरे जादूगर श्याम तू बड़ोई जादूगर।

तेरा रोम रोम जादू की पिटारी नटवर।

तूने लूटे जादू करि बड़ों बड़ों के भी घर।

तूने लूटे परिकर विधि हरि हर घर।

तूने लूटे उमा रमा सरस्वती के भी घर।

तूने लूटे सनकादिक ज्ञानिन घर।

तूने लूटे शुद्ध बुद्ध माया मुक्त जन घर।

तूने लूटे जनकादि विदेहहुँ घर।

तूने लूटे परिकर ब्रज नारिन घर।

तूने लूटे निज जन ब्रज वासिन घर।

तूने लूटे बड़े बड़े सिद्ध योगी जन घर।

तूने लूटे गर्भमुक्त शुकदेव मुनि घर।

Source page 234

तूने लूटे बड़े बड़े नित्यसिद्ध जन घर।

तूने लूटे सिद्ध जीवन्मुक्त जन घर।

तूने लूटे बड़े बड़े ब्रज रसिकन घर।

तूने लूटे जग मोहन मदनहुँ घर।

तूने लूटे बड़े बड़े जगद्गुरुओं के घर।

तूने लूटे निष्काम प्रेम युक्त जन घर।

तूने लूटे दास्य आदि चार भाव वारे घर।

तूने लूटे जो बने हैं तेरे उनहिँन घर।

तूने लूटे बड़े बड़े राक्षस जन घर।

तूने लूटे बड़े बड़े वैष्णवजन घर।

तूने लूटे गणिकादिक पतितन घर।

तूने लूटे सब विधि दीन हीन जन घर।

तूने लूटे जो अकिंचन जन तिन घर।

तूने लूटे काम युक्त प्रेम युक्त जन घर।

तूने लूटे विधि हरि हर पद कामी घर।

तूने लूटे इन्द्र आदि पद कामी भक्त घर।

तूने लूटे अणिमादि सिद्धि कामी भक्त घर।

तूने लूटे पाप पुण्य घुसि जन उर घर।

तूने लूटे तीनों तनु घुसि जन उर घर।

Source page 235

तूने लूटे तीनों कर्म घुसि जन उर घर।

तूने लूटे तीनों गुण घुसि जन उर घर।

तूने लूटे पंचक्लेश घुसि जन उर घर।

तूने लूटे पंचकोश घुसि जन उर घर।

तूने लूटे इन्द्रिय विषयन उर घर।

तूने लूटे तीनों ताप घुसि जन उर घर।

तूने लूटे दोनों राग द्वेष घुसि उर घर।

तूने लूटे जिन उन ने भी लूटा तेरा घर।

तूने लूटे सब घर राधा लूटीं तेरा घर।

तूने लूटे क्यों कर न “कृपालु” उर घर॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २101
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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