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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 8 · 16/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 8 · Kirtan 8

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

51 source linesपुस्तक पृष्ठ 18–21PDF 35–38

कृष्ण भक्ति ही वेद बताय।

(नीको लागे...)

कृष्ण भक्ति ही वेद बताय।

कृष्ण भक्ति ही लक्ष्य दिलाय।

Source page 19

कृष्ण भक्ति दे कृष्ण मिलाय।

भक्तिहिं भेद अनेक बताय।

वामें द्वै ही प्रमुख बताय।

इक तो साधन भक्ति कहाय।

इक तो सिद्धा भक्ति बताय।

सोई प्रेमा भक्ति कहाय।

साधन भक्ति साध्य दिलवाय।

नवधा साधन भक्ति बताय।

वामें स्मरण प्रमुख कहलाय।

मन ही बंधन मोक्ष दिलाय।

मन का कार्य स्मरण बतलाय।

याते मन ते ध्यान कराय।

कृष्ण रूप अगनित श्रुति गाय।

जोइ मन भाये रूप बनाय।

करु शृंगार जोइ मनभाय।

गाइय नाम जोइ मनभाय।

गाइय गुन गन जोइ मनभाय।

गाइय लीला जोइ मनभाय।

कृष्ण मिलन व्याकुलता लाय।

Source page 20

शिशु जनु क्रंदन करुण सुनाय।

भोला भाला मन बनि जाय।

भाव रहे निष्काम सदाय।

भुक्ति मुक्ति दोउ मन नहिं भाय।

माँगहु दर्शन श्याम सदाय।

जब दर्शन दे दें बलभाय।

तब वर माँगु प्रेम बलभाय।

बुधि मानत जग महँ सुख आय।

बुधि को बार बार समुझाय।

आत्मा दिव्य अंश बलभाय।

जग माया प्रपंच कहलाय।

आत्मा विषय एक बलभाय।

तनु का विषय जगत कहलाय।

आत्मा सुख जग दे न सकाय।

याते जग ते मनहिं हटाय।

कृष्ण रूप में मनहिं लगाय।

यदि जग में पुनि मन हटि आय।

तब पुनि हरि में वाय लगाय।

यह अभ्यास सतत करवाय।

Source page 21

यह ही साधन भक्ति कहाय।

यही भक्ति मन शुद्ध कराय।

कृष्ण स्वरूप शक्ति इक आय।

सोइ शक्ति मन दिव्य बनाय।

तब मन प्रेम पात्र बनि जाय।

तब हरि दिव्य प्रेम दिलवाय।

ह्लादिनि सार प्रेम कहलाय।

गुरु की कृपा प्रेम सोइ याय।

जीव साध्य यह रसिक बताय।

याके वश “कृपालु” बलभाय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २016
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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