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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 16 · 24/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 16 · Kirtan 16

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

23 source linesपुस्तक पृष्ठ 46–47PDF 63–64

सब शास्त्र वेद बतलाय, है लक्ष्य भक्ति बलभाय।

(हैं बाँको सुन्दर...)

सब शास्त्र वेद बतलाय, है लक्ष्य भक्ति बलभाय।

यह साधन साध्य बताय, अधिकारी हैं सब याय॥

जो सदाचार युत आय, सोउ करत भक्ति बलभाय।

जो दुराचार युत आय, सेाउ कर हरि भक्ति सदाय॥

जो वैरागी कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय।

जो जग रागी जन आय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय॥

जो ज्ञानी जन कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय।

जो अज्ञानी कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय॥

जो जन मुमुक्षु कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय।

जो माया मुक्त कहाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय॥

जो साधक जन कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय।

जो पूर्ण सिद्ध कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय॥

जो पार्षद जन कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय।

जो नित्य पार्षद आय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय॥

सर्वत्र भक्ति बलभाय, सब लोकन भक्ति बताय।

सब इंद्रिन भक्ति कराय, मन ते भी भक्ति कराय॥

Source page 47

सब द्रव्यन भक्ति बताय, सब अर्पित करु बलभाय।

जग जेतिक क्रिया बताय, सब में हरि भक्ति सुहाय॥

जेतिक नर कार्य कराय, सबमें हरि भक्ति बताय।

जेतिक कामना बताय, सबमें हरि भक्ति सुहाय॥

जो फल कामना बताय, वामें भी भक्ति सुहाय।

अभिधेय भक्ति बतलाय, करु भक्ति “कृपालु” सदाय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २024
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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