कीर्तन 1–50
कीर्तन 16 · Kirtan 16
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
सब शास्त्र वेद बतलाय, है लक्ष्य भक्ति बलभाय।
सब शास्त्र वेद बतलाय, है लक्ष्य भक्ति बलभाय।
यह साधन साध्य बताय, अधिकारी हैं सब याय॥
जो सदाचार युत आय, सोउ करत भक्ति बलभाय।
जो दुराचार युत आय, सेाउ कर हरि भक्ति सदाय॥
जो वैरागी कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय।
जो जग रागी जन आय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय॥
जो ज्ञानी जन कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय।
जो अज्ञानी कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय॥
जो जन मुमुक्षु कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय।
जो माया मुक्त कहाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय॥
जो साधक जन कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय।
जो पूर्ण सिद्ध कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय॥
जो पार्षद जन कहलाय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय।
जो नित्य पार्षद आय, सोउ कर हरि भक्ति सदाय॥
Source page 47
सब द्रव्यन भक्ति बताय, सब अर्पित करु बलभाय।
जग जेतिक क्रिया बताय, सब में हरि भक्ति सुहाय॥
जेतिक नर कार्य कराय, सबमें हरि भक्ति बताय।
जेतिक कामना बताय, सबमें हरि भक्ति सुहाय॥
