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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 89 · 97/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 89 · Kirtan 89

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

47 source linesपुस्तक पृष्ठ 223–225PDF 240–242

सुनि सुनि उरहन खीझी माय।

(नीको लागे...)

सुनि सुनि उरहन खीझी माय।

अति रिस भरी यशोमति माय।

लै साँटी कर परखत माय।

कब आवे नटखट बलभाय।

इतने में नटखट झट आय।

भाज्यो लखि कर साँटी माय।

पाछे पाछे भाजीं माय।

पुनि पुनि लख पाछे बलभाय।

आजु न छोडूँ तोहिं कह माय।

दोउ भाजत तनु सुधि बिसराय।

है अग्राह्य ब्रह्म श्रुति गाय।

जीव शक्ति ते पकरि न पाय।

Source page 224

याते मैया पकरि न पाय।

लथपथ भईं पसीना माय।

अब औरहुँ रिस भइ तनु माय।

आई कृपा शक्ति लखि माय।

याते गिर्यो आपु बलभाय।

गिर्यो कान्ह पकर्यो कर माय।

बाँध्यो ऊखल कसि कसि माय।

पुनि कर साँटी लै कह माय।

घर घर माखन लँगर चुराय।

तोरे घर का कमी बताय।

तोरे घर नव लख हैं गाय।

जब मारन हित साँटी उठाय।

सखियन पकरीं तुरतहिं माय।

आजु न छोडौं इमि कह माय।

तनु थर थर काँपे बलभाय।

दोउ दृग अँसुवन धार बहाय।

सिसक सिसक रोये बलभाय।

छीनि लई सखि साँटी माय।

सखियन कही बात सुनु माय।

Source page 225

याने चोरी नहिं की माय।

हमने करी मसखरी माय।

तू तो साँचुहिं गइ पतियाय।

सखियन ऊखल बन्ध छुड़ाय।

ब्रह्म जीव बंधनहिं छुड़ाय।

ब्रह्म बन्ध इत जीव छुड़ाय।

रोवत कान्ह माय उर लाय।

डाँटि भगायहु सखियन माय।

पुनि कह सिसकि सिसकि बलभाय।

तोसों बात करौं नहिं माय।

औरहिं कोउ बनैहौं माय।

तेरी गोद न ऐहौं माय।

मैया बहु विधि कान्ह मनाय।

तब मानेहु मन मन मुसकाय।

कह “कृपालु” बलि छल बलभाय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २097
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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