लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content

ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 76 · 84/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 76 · Kirtan 76

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

11 source linesपुस्तक पृष्ठ 194PDF 211

मम ठाकुर श्यामा श्याम, दोउ पूर्णकाम अभिराम।

(हैं बाको सुन्दर...)

मम ठाकुर श्यामा श्याम, दोउ पूर्णकाम अभिराम।

चिन्मय वृन्दावन धाम, लीला कर दिव्य ललाम॥

दोउ तन सुखघन अभिराम, दोउ प्रेम रूप रस धाम।

दोउ भज दोउ आठोँ याम, दोउ धनी प्रेम निष्काम॥

श्यामा बरसानो धाम, है श्याम धाम नँदगाम।

इक भोरी श्यामा नाम, इक नटखट हैँ घनश्याम॥

नहिं चह सुख मायिक धाम, नहिँ चह सुख मुक्ति ललाम।

सेवा चह श्यामा श्याम, बस इक यह रह मन काम॥

रसना रट श्यामा श्याम, मन चिन्तन कर वसुयाम।

उर रहे प्रेम निष्काम, सिर रह “कृपालु” गुरु पाम॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २084
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

Related official book listing · Official full collection · Official author website · Read as text