कीर्तन 51–100
कीर्तन 76 · Kirtan 76
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मम ठाकुर श्यामा श्याम, दोउ पूर्णकाम अभिराम।
मम ठाकुर श्यामा श्याम, दोउ पूर्णकाम अभिराम।
चिन्मय वृन्दावन धाम, लीला कर दिव्य ललाम॥
दोउ तन सुखघन अभिराम, दोउ प्रेम रूप रस धाम।
दोउ भज दोउ आठोँ याम, दोउ धनी प्रेम निष्काम॥
श्यामा बरसानो धाम, है श्याम धाम नँदगाम।
इक भोरी श्यामा नाम, इक नटखट हैँ घनश्याम॥
नहिं चह सुख मायिक धाम, नहिँ चह सुख मुक्ति ललाम।
सेवा चह श्यामा श्याम, बस इक यह रह मन काम॥
