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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 86 · 94/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 86 · Kirtan 86

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

70 source linesपुस्तक पृष्ठ 214–217PDF 231–234

बैठी सखि सँग यशुमति माय।

(नीको लागे...)

बैठी सखि सँग यशुमति माय।

करति रहीं चर्चा बलभाय।

पूर्ण चंद्र्र नभ महँ रह भाय।

आँगन खेलत रह बलभाय।

औचक लख्यो चंद्र बलभाय।

पग पटकत आयो ढिंग माय।

वेणी पकरि कह्यो बलभाय।

ऊँ ऊँ ला दे ला दे माय।

मैया कह का चहिय बताय।

पुनि कह ला दे ला दे माय।

पुनि पूछ्यो सखिहूँ बलभाय।

का चह नेकु मोहिं बतलाय।

Source page 215

दूध चहिय का कजरी गाय।

तूत नाहिं चह कह तुतुराय।

पुनि का तू चह दधि बतलाय।

ना ना ना ना कह बलभाय।

सखि कह का खुरचन दउँ लाय।

ना ना ना ना कह बलभाय।

का दउँ तोहिं मलाई लाय।

ना ना ना ना कह बलभाय।

पुनि का माखन चहिय बताय।

ना ना ना ना कह बलभाय।

सखि कह पुनि का चहिय बताय।

शशि अँगुरिन कह यह दे लाय।

सखि कह यह कैसे दउँ लाय।

यह तो राजहंस कहलाय।

तैरत नित नभ सरहिं सदाय।

अब मचले औरहुँ बलभाय।

पग पटकें लोटें बलभाय।

अपर सखी कह सुनु बलभाय।

यह न हंस यह चंद्र कहाय।

Source page 216

लाला कह जो हो दे लाय।

तब बोली पुनि यशुमति माय।

यह न हंस नहिं चन्द्रहुँ आय।

यह तो साँचुहिं माखन आय।

किन्तु मिला विष यामें आय।

लखु यामें कालिमा दिखाय।

विष इसमें कैसे मिला माय।

लाला सुनहु कथा मन लाय।

एक क्षीर सागर कहलाय।

लाला कह यह गप्प जनाय।

इतनो दूध कहाँ ते आय।

जाको बनि गयो सागर माय।

लाला सुनु तो पुनि कह माय।

जाने यह संसार बनाय।

वाने दूध समुद्र बनाय।

लाला कह वह को है माय।

लाला वह भगवान कहाय।

वह भगवान कहाँ रह माय।

लाला वह जग व्यापक आय।

Source page 217

यह भी गप्प लगे मोहिं माय।

यह सब कथा पुरानन गाय।

पाप लगे जो गप्प बताय।

अच्छा अब आगे कहु माय।

मंदर गिरि को रई बनाय।

वासुकि नाग रज्जु बनवाय।

सुर असुरन सों हरि मथवाय।

निकस्यो कालकूट विष वाय।

दूध मथे माखन सब पाय।

यह भी मो कहँ गप्प जनाय।

अच्छा अब कहु आगे माय।

वा विष पियो शंभु ने आय।

पुनि निकस्यो माखन कह माय।

याते विष मिश्रित यह आय।

याको कोऊ कबहुँ न खाय।

यह सुनि सोय गये बलभाय।

लम्बी साँस लई अब माय।

जान बची जनु लाखों पाय।

धनि “कृपालु” लाला धनि माय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २094
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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