कीर्तन 1–50
कीर्तन 24 · Kirtan 24
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
तू ही स्वामी बलभाय, है सखा तु ही बलभाय।
तू ही स्वामी बलभाय, है सखा तु ही बलभाय।
तू ही है सुत बलभाय, तू ही प्रियतम बलभाय।
तू ही माता बलभाय, है पिता तुु ही बलभाय।
भ्राता तू ही बलभाय, त्राता तू ही बलभाय।
तू ही अंशी बलभाय, तू ही मम गति बलभाय।
तू ही मम मति बलभाय, तू ही मम रति बलभाय।
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तू ही साक्षी बलभाय, तू ही है प्रभु बलभाय।
है सुहृत तु ही बलभाय, तू ही निवास बलभाय।
तू ही आत्मा बलभाय, तू ही पालक बलभाय।
तू ही दाता बलभाय, तू ही प्रेरक बलभाय।
तू ही मम धन बलभाय, तू ही मम बल बलभाय।
तू ही जीवन बलभाय, तू ही मम इक बलभाय।
तू ही रह उर बलभाय, तू ही दे फल बलभाय।
है तु ही हितू बलभाय, तू ही सब कछु बलभाय।
