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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 81 · 89/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 81 · Kirtan 81

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

45 source linesपुस्तक पृष्ठ 202–204PDF 219–221

नंद महल महँ बजत बधाई।

(नीको लागे...)

नंद महल महँ बजत बधाई।

मानहुँ नंद परीनिधि पाई।

जा कहँ श्रुति अनादि अज गाई।

सो बनाय ब्रज यशुमति माई।

जेहि आनँद घन तन श्रुति गाई।

सोइ चिन्मय तनु आपु बनाई।

जानति सुत तनु प्राकृत माई।

पितु वसुदेव देवकी माई।

प्रकटे उनके सन्मुख जाई।

रूप चतुर्भुज उनहिं दिखाई।

दोउ किय अस्तुति श्रुति जस गाई।

पुनि उन ते कह देवकी माई।

अब बनु मम सुत कुँवर कन्हाई।

तब बनि गये नवजात कन्हाई।

पुनि वाने माया फैलाई।

बंदीगृह तजि गोकुल जाई।

Source page 203

तहाँ सुता यशुमति थी जाई।

माया करि यशुमतिहुँ सुलाई।

सुता लिये वसुदेव उठाई।

तहँ सुलाय दिय कुँवर कन्हाई।

खुली आँख जब जागी माई।

देखा रोवत कुँवर कन्हाई।

वाने जानी मैंने जाई।

इमि बनि गई यशोमति माई।

सब ब्रज जानि गयो शिशु जाई।

बाजन लागी महल बधाई।

नाचत गावत लोग लुगाई।

वाद्य बजावत बहु विधि लाई।

जय जयकार करत सब आई।

बड़ी भीर यशुमति घर आई।

कोउ कह जय जय कुँवर कन्हाई।

कोउ कह जय जय यशुमति माई।

सब मिलि एतिक शोर मचाई।

परत न कहुँ कछु शब्द सुनाई।

विधि हरि हर जयकार कराई।

Source page 204

नारद शारद गुन गन गाई।

देही सब विदेह पद पाई।

नाचत गोप सँग नंद राई।

गोप खेल दधि काँदौ आई।

मोतिन मणिन लुटावति माई।

कोउ न लूटन महँ रुचि लाई।

सब चह देखन कुँवर कन्हाई।

आये लखन शंभु ढिंग माई।

धनि “कृपालु” नँद सुत धनि माई॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २089
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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