कीर्तन 51–100
कीर्तन 62 · Kirtan 62
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी राधे मेरी राधे मेरी प्यारी राधे,
मेरी राधे मेरी राधे मेरी प्यारी राधे,
तोहिं तजि जाउँ कित तू ही बता दे।
तेरी माया ने भुलाया मोहि प्यारी राधे,
तूने क्यों भुलाया मोहिँ नेकु बता दे।
पूत तो कुपूत होँय जग में भी राधे,
माता क्या कुमाता भईं कोई बता दे।
मायावश भूलूँ भी जो मैं तोहिं राधे,
तू तो जनि भूलेहु मोहिं भुला दे।
मैं हूँ मायाधीन तू है मायाधीश राधे,
माया को भगा दे मायातीत बना दे।
तेरी टेढ़ी भौंह लखि काँपे ब्रह्म राधे,
मेरी माया को भी सोई भौंह दिखा दे।
जाको तू जना दे सोई जाने तोहिं राधे,
बिनु तेरी कृपा कोई जाना हो बता दे।
Source page 155
जग शिशु मुख माँ चुवा दे पय राधे,
तू तो है पतित पावनि प्यारी राधे,
मोसो है पतित कौन तू ही बता दे।
जानि के पतित पावनि तोहिं राधे,
किये मनमाने पाप मोहिं दोष का दे।
कृपा करु कृपा करु कृपामयी राधे,
और कछु ना दे राधे प्रेम सुधा दे।
गोपी प्रेम देहि गोपी प्रेम देहि राधे,
भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ सुख आदि ना दे।
तेरा सुख मेरा सुख बनि जाय राधे,
निज सुख काम मेरे मन ते मिटा दे।
गुरु ने जनाया जाना माना नहिं राधे,
भोरी भारी प्यारी प्यारी छवि दिखला दे।
Source page 156
उत मेरे पाछे निज माया को लगा दे।
सदा ते ही माना मैंने मेरी भी तू राधे,
अब “ही” लगा दे राधे, “भी” को हटा दे।
माया वश भी हो करे पाप भी न राधे,
माया ते तो हारे विधि हरि हर राधे,
मेरी है बिसात कहा तू ही बता दे।
माँगा भीख लख चौरासी द्वार राधे,
सब थे भिखारी पुनि मोहिं भीख का दे।
तू ही मेरी थी है तू ही रहेगी भी राधे,
चाहे मोहिं अपनाये चाहे ठुकरा दे।
प्यारी बरसाने वारी भोरी भारी राधे,
निज दासी दासी दासी दासी बना दे।
सारा जग जाने मोहिं तेरी दासी राधे,
जग को मिटा दे भ्रम दासी बना दे।
Source page 157
तू तो देना देना जाने दयामयी राधे,
ले के जो दे जग व्यापार बता दे।
तू चाहे आवे चाहे नहिं आवे राधे,
रो रो के बुलाया करुँ ऐसी बना दे।
स्वर्ग सुख ना दे अपवर्ग सुख ना दे,
राधे राधे गावूँ नित ध्यावूँ नित राधे,
बिगरी बनाने वारी मेरी प्यारी राधे,
ब्रजरस बरसाने वारी प्यारी राधे,
तू तो कृपा करे दीन जन पर राधे,
ऐसी कृपा करु मोहिं दीन बना दे।
तेरे सब सुत तो हैं खरे खरे राधे,
मुझ खोटे को भी खरे संग चला दे।
Source page 158
बीते युग युग अब पय तो पिला दे।
तेरी सी कठोर माँ तो जग में न राधे,
रससिंधु हो के रस बिंदु मोहिं ना दे।
काऊ सों बताऊँ न मैं साँची कहूँ राधे,
तेरा सुत माँगे भीख द्वार द्वार राधे,
तेरी लाज जाय याते प्रेम सुधा दे।
तेरी दासी मारे तेेरे सुत कहँ राधे,
उर बैठी देखे कैसी माँ है तू बता दे।
माना तू कहेगी प्रेम मैं न दउँ राधे,
काऊ गोपी ते कहि प्रेम दिला दे।
अच्छा हूँ बुरा हूँ जो हूँ तेरा ही हूँ राधे,
यदि मैं बुरा हूँ मोहिं अच्छा बना दे।
बुरे यदि होते नहिं जग महँ राधे,
अच्छों को भी अच्छा कौन कहता बता दे।
तेरे द्वार गये बड़े बड़े रंक राधे,
कोई खाली हाथ लौटा हो तो बता दे।
Source page 159
एक दिन अवशि मिलोगी मोहिं राधे,
तुम बिनु जीना नहिं जीना कछु राधे,
ऐसे जीने ते तो मोहिं मौत दिला दे।
जग में बने बने के साथी सब राधे,
तेरी महिमा को श्रुतिहुँ ना जाने राधे,
