कीर्तन 101–134
कीर्तन 106 · Kirtan 106
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
नारी जाने कछु प्रीति रीति बनवारी।
नारी जाने कछु प्रीति रीति बनवारी।
तो भी वारी वारी वारी सारी ब्रजनारी।
Source page 266
पुनि जाने कैसे प्रीति रीति बनवारी।
मग में ही कह मोहिं प्यार करु प्यारी।
बिनु जाने पहिचाने भेंटे परनारी।
लोग क्या कहेंगे सोचे नहिँ बनवारी।
सब सोइ कह सब सो है तू ही प्यारी।
झाँके घुँघटा उठाके मुख परनारी।
निधरक कह कहु मोहिं पिय प्यारी।
Source page 267
जाने जादू यंत्र मंत्र तंत्र बनवारी।
जब कोऊ याके विरह में रोये नारी।
बनवारी ते तो हारी सब ब्रजनारी।
बनवारी ते तो हारी उमा रमा नारी।
इक प्रकटी हैं श्यामा बरसाने वारी।
तब रोये यह कहि “हाय हाय प्यारी,।
ऐसे रोवे बनवारी हँसे ब्रजनारी।
हैँ प्रेम सुधा निधि बरसाने वारी।
