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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 106 · 114/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 106 · Kirtan 106

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

43 source linesपुस्तक पृष्ठ 265–267PDF 282–284

नारी जाने कछु प्रीति रीति बनवारी।

(नथवारी रंगीली...)

नारी जाने कछु प्रीति रीति बनवारी।

तो भी वारी वारी वारी सारी ब्रजनारी।

था प्रथम तो अकेला ब्रह्म बनवारी।

आया ब्रज तो चराया गाय बनवारी।

Source page 266

सँग पाया भी गँवारन बनवारी।

पुनि जाने कैसे प्रीति रीति बनवारी।

मग में ही कह मोहिं प्यार करु प्यारी।

बिनु जाने पहिचाने भेंटे परनारी।

लोग क्या कहेंगे सोचे नहिँ बनवारी।

सब सोइ कह सब सो है तू ही प्यारी।

झाँके घुँघटा उठाके मुख परनारी।

निधरक कह कहु मोहिं पिय प्यारी।

सब सोइ कह तेरा चेरा बनवारी।

सब सोइ कह चलु कुंजन प्यारी।

मारे दृगन बान लखि ब्रजनारी।

घायल लखि मुसकाय बनवारी।

सखियन माँगे दधि दान बनवारी।

जो न दे फोरे मटुकिहुँ बनवारी।

गर मोतिन लर तोरे बनवारी।

सखि चुनरि उतारे फारे बनवारी।

जब वाको देय कोउ ब्रजनारी गारी।

तब कहे वारी बनवारी बलिहारी।

कह पुनि दे री गारी मीठी लागे प्यारी।

Source page 267

सब सोइ कह तू तो मोरी घरवारी।

जाने जादू यंत्र मंत्र तंत्र बनवारी।

जब कोऊ याके विरह में रोये नारी।

तब वाय लखि मुसकाय बनवारी।

जब कोउ भरे विरह में आह नारी।

तब यह कह वाह वाह बनवारी।

बनवारी ते तो हारी सब ब्रजनारी।

बनवारी ते तो हारी उमा रमा नारी।

बनवारी लखि मदनारी बने नारी।

बनवारी लखि काम चह तनु नारी।

यह जादू की पिटारी है बनवारी।

इक प्रकटी हैं श्यामा बरसाने वारी।

लाय उनको मिला दे याय बनवारी।

तब रोये यह कहि “हाय हाय प्यारी,।

जैसे हम सब को रुलाया बनवारी।

ऐसे रोवे बनवारी हँसे ब्रजनारी।

हैँ प्रेम सुधा निधि बरसाने वारी।

उनते ही प्रीति रीति सीखे बनवारी।

तब रसिक “कृपालु” बने बनवारी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २114
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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