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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 66 · 74/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 66 · Kirtan 66

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

37 source linesपुस्तक पृष्ठ 167–168PDF 184–185

मेरी राधा रानी प्रेम रूप रस खानी,

(तू ही तू ही..)

मेरी राधा रानी प्रेम रूप रस खानी,

मेरी राधा रानी वृंदावन ठकुरानी।

सत चित आनँद घन राधारानी,

जैसी राधारानी वैसी तनु राधारानी।

तप्त सुबरन सम तनु राधारानी,

रोम रोम ब्रजरस चुये राधारानी।

ध्यावें नित ब्रह्म श्याम छवि राधारानी,

गावें मुरलि में गुनगन राधारानी।

आधा माने आपु श्याम बिनु राधारानी,

प्राण पाछे मानें आगे मानें राधारानी।

राधा राधा राधा राधा रटें चक्रपानी,

आधा पलहूँ न कल बिनु राधारानी।

श्याम माने निज स्वामिनि राधारानी,

श्याम रोम रोम बोले नाम राधारानी।

जहँ कहुँ कोउ बोले मेरी राधारानी,

भाजे भाजे जायँ तहँ सारँग पानी।

Source page 168

जहँ जहँ पग धरें मेरी राधारानी,

तहँ तहँ सिर धरें सारँग पानी।

जब निकले सवारी ब्रज राधारानी,

सारँग पानी करें अगवानी।

जब बैठेँ सिंहासन राधारानी,

नीचे बैठि चापें पग सारँग पानी।

चलें जब रास हित सारँग पानी,

धरें मुकुट उतारि पग राधारानी।

श्याम राखें सोइ रुचि जोइ राधारानी,

नित तकत रहत भौंह चक्र पानी।

जाके डर डरे डर सो हैं चक्रपानी,

सोऊ जाके डर डरे सो हैं राधारानी।

श्याम लखि सोरहोँ सिँगार राधारानी,

पुनि पुनि कहेँ बलिहार राधारानी।

सखि सँग जब चलें मेरी राधारानी,

जय हो जय हो जय हो कहें सारँग पानी।

लाजे छवि हूँ लखि छवि राधारानी,

मोहे आपु निज छवि लखि राधारानी।

राधा रानी पटतर हैं राधारानी,

तुमहूँ “कृपालु” बनु सखि राधारानी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २074
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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