कीर्तन 51–100
कीर्तन 66 · Kirtan 66
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरी राधा रानी प्रेम रूप रस खानी,
मेरी राधा रानी प्रेम रूप रस खानी,
मेरी राधा रानी वृंदावन ठकुरानी।
जैसी राधारानी वैसी तनु राधारानी।
ध्यावें नित ब्रह्म श्याम छवि राधारानी,
गावें मुरलि में गुनगन राधारानी।
आधा माने आपु श्याम बिनु राधारानी,
प्राण पाछे मानें आगे मानें राधारानी।
राधा राधा राधा राधा रटें चक्रपानी,
श्याम माने निज स्वामिनि राधारानी,
श्याम रोम रोम बोले नाम राधारानी।
Source page 168
जहँ जहँ पग धरें मेरी राधारानी,
नीचे बैठि चापें पग सारँग पानी।
श्याम राखें सोइ रुचि जोइ राधारानी,
जाके डर डरे डर सो हैं चक्रपानी,
सोऊ जाके डर डरे सो हैं राधारानी।
श्याम लखि सोरहोँ सिँगार राधारानी,
पुनि पुनि कहेँ बलिहार राधारानी।
सखि सँग जब चलें मेरी राधारानी,
जय हो जय हो जय हो कहें सारँग पानी।
लाजे छवि हूँ लखि छवि राधारानी,
