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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 84 · 92/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 84 · Kirtan 84

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

64 source linesपुस्तक पृष्ठ 208–211PDF 225–228

इक दिन आपुहिं यशुमति माय।

(नीको लागे...)

इक दिन आपुहिं यशुमति माय।

दधि लागी मथने निज कर माय।

दासिहिं औरहिं सेवा बताय।

मन लाल बाल लीला में लगाय।

रसना सों लाल बाल लीलायें गाय।

कटि तट लहँगा रेशमी सुहाय।

Source page 209

सुत स्नेहयुत स्तन दूध चुवाय।

नेती खींचत थकि गई माय।

झूलत कर्णफूल भल माय।

कर कंकन कनकन मनभाय।

मुख पर स्वेद बिन्दु झलकाय।

वेणी फूलहुँ गिरत लखाय।

इतने में आये बलभाय।

पकर्यो मथत मथानी माय।

बरबस चढ़ि गयो गोदिहिं माय।

पीने लगे पयोधर माय।

पुनि पुनि लखत लाल मुख माय।

पुनि पुनि चूमत मुख बलि जाय।

देखा दूध अंगीठी माय।

उबलि उबलि गिरे भू पर आय।

लालहिं द्रुत दिये भूमि बिठाय।

दौड़ीं दूध उतारन माय।

आयो क्रोध तबै बलभाय।

फरकन लगे होठ बलभाय।

दशनन ते लिये होठ दबाय।

Source page 210

लोढ़ा पड़ा लखा बलभाय।

वाको लाला लिये उठाय।

दधि मटका फोरेउ बलभाय।

पय उतारि लौटीं जब माय।

देखा फूटा मटका माय।

जान कान्ह करतूतहिं माय।

मन ही मन मुसकाईं माय।

खरे लखा ऊखल बलभाय।

छींके का माखन बलभाय।

दोउ कर कपिन रहे लुटवाय।

पाछे ते मैया गइ धाय।

देखा कर साँटी बलभाय।

ऊखल कूदि भजे बलभाय।

जो योगिन समाधि नहिं आय।

वाको पकरन धाईं माय।

भाजत भाजत थकि गईं माय।

भाजत गति भई धीमी माय।

मुख पर स्वेद बिंदु झलकाय।

वेणी फूल गिरे भू आय।

Source page 211

आई दया तबहिं बलभाय।

कान्ह दिये निज कहँ पकराय।

पुनि मैया साँटिहिं डरपाय।

दोउ कर नैन मलें बलभाय।

थर थर काँपे तनु बलभाय।

सिसक सिसक रोयें बलभाय।

गालन पर काजल बलभाय।

माय विकल देखा बलभाय।

आई दया तबहिं उर माय।

साँटी फेंकि दई तब माय।

सोचा ऊखल बाँधो याय।

ऊखल बाँधन लागीँ माय।

द्वै अंगुल रस्सी घटि जाय।

पुनि पुनि रस्सी जोरति जाय।

पुनि द्वै अंगुल लघु ह्वै जाय।

बाँधत बाँधत थकि गइ माय।

आई दया हृदय बलभाय।

दिय आपुहिँ आपुहिँ बँधवाय।

पद “कृपालु” दामोदर पाय॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २092
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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