कीर्तन 51–100
कीर्तन 77 · Kirtan 77
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मेरे दोउ श्यामा श्याम, हैँ कोटि काम अभिराम।
मेरे दोउ श्यामा श्याम, हैँ कोटि काम अभिराम।
वृन्दावन धाम ललाम, विहरत नित आठोँ याम॥
काहुहिँ बल प्रेम अकाम, काहुहिँ बल श्यामा श्याम।
जेहि परवश श्यामा श्याम, मम बल है उनकोइ नाम॥
कोउ चह स्वर्गादिक धाम, कोउ चह बैकुण्ठ ललाम।
हम तो चह श्यामा श्याम, तव सेवा आठोँ याम॥
