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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 44 · 52/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 44 · Kirtan 44

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

36 source linesपुस्तक पृष्ठ 117–119PDF 134–136

जय जय राधारानी राधारानी राधारानी।

(मतवारी प्यारी...)

जय जय राधारानी राधारानी राधारानी।

जय जय अवढर दानी राधारानी।

जय जय ब्रज रस खानी राधारानी।

जय जय प्रेम सुख दानी राधारानी।

जय जय ठाकुर ठकुरानी राधारानी।

जय जय वृंदावन रानी राधारानी।

जय जय चिन्मय ब्रजरानी राधारानी।

जय जय चितघन सुखघन राधारानी।

जय जय आनँदघन तन राधारानी।

Source page 118

जय जय ब्रह्म रूप घन राधारानी।

जय जय दुति दामिनि तन राधारानी।

जय जय ब्रज बनितनि धन राधारानी।

जय जय चुवे ब्रजरस तन राधारानी।

जय जय विहरति वृंदावन राधारानी।

जय जय प्राण प्राण धन श्री राधारानी।

जय जय जीवन जीवन राधारानी।

जय जय निर्धन को धन राधारानी।

जय जय दीन जनन धन राधारानी।

जय जय पतित जनन धन राधारानी।

जय जय गति गज गामिनि राधारानी।

जय जय छवि अभिरामिनि राधारानी।

जय जय मादन स्वामिनि राधारानी।

जय जय सँग ब्रज भामिनि राधारानी।

जय जय श्यामहु स्वामिनि राधारानी।

जय जय प्रेमहुँ स्वामिनि राधारानी।

जय जय रूपहुँ स्वामिनि राधारानी।

जय जय अग जग जननी राधारानी।

जय जय अग जग पालिनि राधारानी।

Source page 119

जय जय त्रिभुवन मोहिनि राधारानी।

जय जय छवि छवि मोहिनि राधारानी।

जय जय रति मन मोहिनि राधारानी।

जय जय निज जन मोहिनि राधारानी।

जय जय मोहन मोहिनि राधारानी।

जय जय निज मन मोहिनि राधारानी।

जय जय मम “कृपालु” सोइ राधा रानी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २052
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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