कीर्तन 51–100
कीर्तन 68 · Kirtan 68
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मोरी वृषभानु दुलार, भोरी भारी सुकुमार।
मोरी वृषभानु दुलार, भोरी भारी सुकुमार।
जेहि चाकर नंदकुमार, मम अलबेली सरकार॥
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छवि कनक मुकुट छविदार, सिर शीशफूल बलिहार।
भल चारु चंद्रिका धार, वेणिहुँ लिये सुमन सँवार॥
भल मोतिन माँग सँवार, बिंदी अरुणार लिलार।
काजर नैनन कजरार, चितवनि बह ब्रजरस धार॥
श्रुति कर्ण फूल रतनार, नासा नथ बेसर धार।
मृदु मुसकनि मधुर निहार, लखि को न जाय बलिहार॥
गर मणिन मोतियन हार, कर मणिमय कंकण धार।
पहुँची चूरी छविदार, भुज बाजूबंद निहार॥
सिर चूनरि जरिन किनार, उर कंचुकि छवि छविदार।
नीलांबर पर बलिहार, कटि मणिमय किंकिणि धार॥
मणिमय पायल पग धार, बिछुवनि छवि अति छविदार।
दोउ पग जावक अरुणार, नख सिख सोरह शृंगार॥
