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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 68 · 76/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 68 · Kirtan 68

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

19 source linesपुस्तक पृष्ठ 171–172PDF 188–189

मोरी वृषभानु दुलार, भोरी भारी सुकुमार।

(हैं बाको सुन्दर...)

मोरी वृषभानु दुलार, भोरी भारी सुकुमार।

जेहि चाकर नंदकुमार, मम अलबेली सरकार॥

सत चित सुख घन तनु धार, गौरिहुँ गोरी सुकुमार।

जेहि परिकर सब ब्रजनार, मम सोइ स्वामिनि सरकार॥

Source page 172

छवि कनक मुकुट छविदार, सिर शीशफूल बलिहार।

भल चारु चंद्रिका धार, वेणिहुँ लिये सुमन सँवार॥

भल मोतिन माँग सँवार, बिंदी अरुणार लिलार।

काजर नैनन कजरार, चितवनि बह ब्रजरस धार॥

श्रुति कर्ण फूल रतनार, नासा नथ बेसर धार।

मृदु मुसकनि मधुर निहार, लखि को न जाय बलिहार॥

गर मणिन मोतियन हार, कर मणिमय कंकण धार।

पहुँची चूरी छविदार, भुज बाजूबंद निहार॥

सिर चूनरि जरिन किनार, उर कंचुकि छवि छविदार।

नीलांबर पर बलिहार, कटि मणिमय किंकिणि धार॥

मणिमय पायल पग धार, बिछुवनि छवि अति छविदार।

दोउ पग जावक अरुणार, नख सिख सोरह शृंगार॥

वधि हरि हर कर जयकार, स्वागत कर नंदकुमार।

आरति कर सब ब्रजनार, हौं कह “कृपालु” बलिहार॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २076
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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