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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 121 · 129/142

कीर्तन 101–134

कीर्तन 121 · Kirtan 121

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

41 source linesपुस्तक पृष्ठ 303–305PDF 320–322

मोते लिपट न निपट यमुन तट हट।

(नथवारी रंगीली...)

मोते लिपट न निपट यमुन तट हट।

लखु लखें सखा सखी घूर घूर नटखट।

मैं भी क्वांरी तू भी क्वांरो तानो मारे जग झट।

तेरी कारी करतूत सब जाने नटखट।

तेरे रोम रोम भरा कूट कूट के कपट।

मैं हूँ तेरी यह तूने ही कहा है नटखट।

माया मारे तेरी प्यारी को तू देखे नटखट।

यह बड़ अचरज मोहिं लागे नटखट।

मम उर रह दोउ हम तुम नटखट।

माया तम कैसे रह तुम रवि नटखट।

प्यारी करे पाप लिखे वाय पिय नटखट।

पाप ते न रोके पिय कैसो नटखट।

तू है जग व्यापक तूने कहा नटखट।

काहे सामने न आये काहे डरे नटखट।

तू है सत्यसंकल्प तूने कहा नटखट।

प्यारिहिं अपनाउ संकल्पहिं झट।

Source page 304

संकल्प किये तेरा कहा जाय घट।

सिता मिले जल जल लागे मीठा नटखट।

तू है मुझमें न मिला तेरा सुख नटखट।

तूने बार बार लिये अवतार नटखट।

दिव्य छवि न दिखायो कियो प्यारी सों कपट।

सँग घूमें द्वार लख चौरासी नटखट।

मैं दुखी तू सुखी नित रह नटखट।

प्यारी करे पाप दंड देय पिय नटखट।

पिय करे पाप रहे निष्पाप नटखट।

यह कैसा तेरा न्याय बता दे नटखट।

मेरी शरण में आ जा कह मोते नटखट।

उत माया को लगा दे मेरे पाछे नटखट।

कहँ लौं कह अवगुन तेरे नटखट।

भजो माता पिता तूने श्रुति कह नटखट।

भज्यो तजि माता पिता बंदीगृह नटखट।

विधि को भी बनाया तूने बुद्धू नटखट।

शिव को भी बनाया शिवानी नटखट।

मैं हूँ ऋणी कहा गोपियों ते तूने नटखट।

तजि गयो गोपिन मधुपुरी नटखट।

Source page 305

किय ब्याह सोला हजार एक सौ आठ झट।

भये प्रति नारि दस दस सुत नटखट।

पुनि सबको लड़ा के मरवाया नटखट।

तू ने किसी को भी नहिं छोड़ा ओ नटखट।

ताते दूर दूर रहूँ हौँ “कृपालु” नटखट॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २129
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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