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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 95 · 103/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 95 · Kirtan 95

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

50 source linesपुस्तक पृष्ठ 238–241PDF 255–258

काहे लिया चितचोर मोर चोर सिरमोर।

(नथवारी रंगीली...)

काहे लिया चितचोर मोर चोर सिरमोर।

लोग जग आवें सीखें बने चोर सिरमोर।

तू तो चोर बनि के ही आयो जग चितचोर।

घुसा चोरी चोरी माता पिता चित चतचोर।

चोरी चोरी ही फुलाया माँ का पेट चितचोर।

आपु गया नहिं देवकी के पेट चितचोर।

निज तनु भी बनाया नहिं पेट चितचोर।

तूने नौ महीना माँ को दिया धोखा चितचोर।

Source page 239

वसुदेव देवकी थे कारागार चितचोर।

कैसे घुसा कारागार भीतर चितचोर।

तूने न तो कारागार ताला तोरा चितचोर।

न तो कारागार दीवार फोरा चितचोर।

कारागार चारों ओर पहरा था चितचोर।

शंख चक्र गदा पद्म ले के घुसा चितचोर।

कारागार बनि आया तू किशोर चितचोर।

ऐसी चोरी काऊ देखी न सुनी चितचोर।

पुनि कैसे बना नवजात शिशु चितचोर।

भागा पितु सँग कारागार ते भी चितचोर।

कैसे सोये सब पहरेदार चितचोर।

कैसे खुला ताला कारागार द्वार चितचोर।

कैसे यमुना ने दिया तोहिं जाने चितचोर।

भादोँ में तो होता यमुना में पूर चितचोर।

कैसे घुसा नंद घर आधी रात चितचोर।

यशुदा ने जाया सुता योगमाया चितचोर।

यह जाना नहिं यशुदा ने कैसे चितचोर।

सुता भी तो रोई होगी पैदा होके चितचोर।

कैसे रोना नहिं सुना दासी दास चितचोर।

Source page 240

तू भी रोया नहिं घुसा चुपचाप चितचोर।

सुता चुप चाप ले के कैसे गये चितचोर।

गये कारागार कैसे वसुदेव चितचोर।

कैसे भयो ताला बंद बंदीगृह चितचोर।

जब जागी यशुमति देखा तोहिं चितचोर।

जानी जना नहिं सुता जना सुत चितचोर।

फिर क्या था तू तो बना नंद सुत चितचोर।

जिसने भी देखा तोहि ब्रज महँ चितचोर।

सब नर नारी चित चोरे तूने चितचोर।

विधि हरि हर चित चोरे तूने चितचोर।

उमा रमा सरस्वती चित चोरे चितचोर।

सनकादिकहूँ चित चोरे चितचोर।

नारद शारद चित चोरे चितचोर।

जग आँख बचा के चोरी करे चितचोर।

तू तो आँख मिला के चोरी करे चितचोर।

जग सोये लोग लखि चोरी करे चितचोर।

तू तो मुरली बजा के चोरी करे चितचोर।

तेरे जैसा चोर पहले हुआ न चितचोर।

तेरे जैसा चोर आगे भी न होगा चितचोर।

Source page 241

शिशु काल में ही जब यह हाल चितचोर।

बड़ा हो के जाने क्या करेगा तू चितचोर।

मेरा चित भी चुरा ले तू “कृपालु” चितचोर॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २103
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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