कीर्तन 51–100
कीर्तन 95 · Kirtan 95
Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
काहे लिया चितचोर मोर चोर सिरमोर।
काहे लिया चितचोर मोर चोर सिरमोर।
लोग जग आवें सीखें बने चोर सिरमोर।
तू तो चोर बनि के ही आयो जग चितचोर।
घुसा चोरी चोरी माता पिता चित चतचोर।
चोरी चोरी ही फुलाया माँ का पेट चितचोर।
आपु गया नहिं देवकी के पेट चितचोर।
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वसुदेव देवकी थे कारागार चितचोर।
कैसे घुसा कारागार भीतर चितचोर।
तूने न तो कारागार ताला तोरा चितचोर।
न तो कारागार दीवार फोरा चितचोर।
कारागार चारों ओर पहरा था चितचोर।
शंख चक्र गदा पद्म ले के घुसा चितचोर।
कारागार बनि आया तू किशोर चितचोर।
ऐसी चोरी काऊ देखी न सुनी चितचोर।
पुनि कैसे बना नवजात शिशु चितचोर।
भागा पितु सँग कारागार ते भी चितचोर।
कैसे खुला ताला कारागार द्वार चितचोर।
कैसे यमुना ने दिया तोहिं जाने चितचोर।
भादोँ में तो होता यमुना में पूर चितचोर।
कैसे घुसा नंद घर आधी रात चितचोर।
यशुदा ने जाया सुता योगमाया चितचोर।
यह जाना नहिं यशुदा ने कैसे चितचोर।
Source page 240
तू भी रोया नहिं घुसा चुपचाप चितचोर।
सुता चुप चाप ले के कैसे गये चितचोर।
गये कारागार कैसे वसुदेव चितचोर।
कैसे भयो ताला बंद बंदीगृह चितचोर।
जब जागी यशुमति देखा तोहिं चितचोर।
जानी जना नहिं सुता जना सुत चितचोर।
फिर क्या था तू तो बना नंद सुत चितचोर।
जिसने भी देखा तोहि ब्रज महँ चितचोर।
सब नर नारी चित चोरे तूने चितचोर।
विधि हरि हर चित चोरे तूने चितचोर।
उमा रमा सरस्वती चित चोरे चितचोर।
जग आँख बचा के चोरी करे चितचोर।
तू तो आँख मिला के चोरी करे चितचोर।
जग सोये लोग लखि चोरी करे चितचोर।
तू तो मुरली बजा के चोरी करे चितचोर।
Source page 241
शिशु काल में ही जब यह हाल चितचोर।
