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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 65 · 73/142

कीर्तन 51–100

कीर्तन 65 · Kirtan 65

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

44 source linesपुस्तक पृष्ठ 164–166PDF 181–183

मेरी राधारानी राधारानी राधारानी।

(नथवारी रंगीली...)

मेरी राधारानी राधारानी राधारानी।

मेरी महरानी ठकुरानी ब्रजरानी।

प्रकटीं बरसाने महरानी।

किय कौन सुकृत कीरति रानी।

जो भईं मैया राधारानी।

Source page 165

किय भानु कौन तप नहिं जानी।

जो भये बाबा राधारानी।

ललितादि सुकृत को सक जानी।

जो बनी सखी राधारानी।

जो सेवति नित राधारानी।

जेहि महिमा श्रुतिहूँ नहिं जानी।

कह नेति नेति श्रुति निज वानी।

तेहि पय पिवाय कीरति रानी।

नित उर लगाव कीरति रानी।

दुलरावति नित कीरति रानी।

जेहि डर डरपत सारँग पानी।

तेहि डरपावति कीरति रानी।

जेहि कृपा चहत सारँग पानी।

तेहि बाँधति कर कीरति रानी।

जो हैं जग जननी महरानी।

तेहि कुँवरि कहति कीरति रानी।

नहिं जाय समाधिहुँ ठकुरानी।

सोइ गोद चहति कीरति रानी।

जो सब जग पालति महरानी।

Source page 166

सोइ माँग नवनि कीरति रानी।

जेहि अस्तुति कर नित श्रुति वानी।

तेहि डाँटति नित कीरति रानी।

हैं शक्ति ह्लादिनी महरानी।

हैं कृपा शक्ति राधारानी।

हैं प्रेम सुधा निधि महरानी।

हैं ब्रजरस अंबुधि ठकुरानी।

जाकर चाकर सारँग पानी।

जेहि ब्रह्म श्याम स्वामिनि मानी।

जब चलति सवारी ठकुरानी।

तब ब्रह्म श्याम कर अगवानी।

जब चलति सखिन सँग महरानी।

हरि कह जय जय जय ठकुरानी।

सोरह सिंगार लखि महरानी।

मुर्छित छिति गिर सारँगपानी।

जेहि भृकुटि तकत सारँगपानी।

जेहि रिझवत नित सारँगपानी।

जेहि पद रज चह सारँगपानी।

तेहि हौँ “कृपालु” स्वामिनि मानी॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २073
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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