तजु मनमानी भजु नँदनंदन।
(नीको लागे...)
तजु मनमानी भजु नँदनंदन।
सब जीवन जीवन नँदनंदन।
सब जीवन अंशी नँदनंदन।
सब उर नित रह सोइ नँदनंदन।
तव स्वामी भी सोइ नँदनंदन।
तव नित्य सखा सोइ नँदनंदन।
तव सुत है सोइ नँदनंदन।
तव प्रियतम भी सोइ नँदनंदन।
तव सब कुछ हैं सोइ नँदनंदन।
तव सँग नित रह सोइ नँदनंदन।
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जग महँ व्यापक सोइ नँदनंदन।
कर्मन फल दे सोइ नँदनंदन।
तोहिँ दिय नर तनु सोइ नँदनंदन।
हैं कृपा सिन्धु सोइ नँदनंदन।
हैं प्रेम सिन्धु सोइ नँदनंदन।
हैं रूप सिन्धु सोइ नँदनंदन।
हैं ब्रज रस निधि सोइ नँदनंदन।
तेरे रक्षक सोइ नँदनंदन।
तेरे पालक सोइ नँदनंदन।
हैं दीनबन्धु सोइ नँदनंदन।
बिनु हेतु सनेही नँदनंदन।
पतितन अपनावत नँदनंदन।
अधमन उर लावत नँदनंदन।
रसना ते रटु नित नँदनंदन।
गावहु नित गुनगन नँदनंदन।
गावहु नित लीला नँदनंदन।
कानन सुनु लीला नँदनंदन।
कानन सुनु गुनगन नँदनंदन।
पग चलु लीला थल नँदनंदन।
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मन ते करु चिंतन नँदनंदन।
मन ते लखु सब महँ नँदनंदन।
मन ते लखु जग महँ नँदनंदन।
मन ते करु सेवा नँदनंदन।
मन ते करु पूजा नँदनंदन।
मन ते परसहु तन नँदनंदन।
मन ते रिझवहु नित नँदनंदन।
मन ते सिंगार करु नँदनंदन।
मन ते बनु प्यारी नँदनंदन।
मन ते मनाउ नित नँदनंदन।
मन ते नहलावहु नँदनंदन।
मन ते खिलाउ नित नँदनंदन।
मन ते पग चापहु नँदनंदन।
मन ते लगाउ उर नँदनंदन।
मन ते माँगहु रति नँदनंदन।
मन ते माँगहु सुख नँदनंदन।
मन तव “कृपालु” गति नँदनंदन॥