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ब्रज रस माधुरी

PART II · KIRTAN 7 · 15/142

कीर्तन 1–50

कीर्तन 7 · Kirtan 7

Kirtan by Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

19 source linesपुस्तक पृष्ठ 17–18PDF 34–35

इष्टों में इष्ट तो है इष्ट श्यामा श्याम।

(मेरे प्राणाधार हैं ...)

इष्टों में इष्ट तो है इष्ट श्यामा श्याम।

रसों में रस तो है रस श्यामा श्याम।

नामों में नाम तो हैं नाम श्यामा श्याम।

रूपों में रूप तो हैं रूप श्यामा श्याम।

धामों में धाम तो है धाम श्यामा श्याम।

गुणों में गुण तो है गुणगण श्यामा श्याम।

Source page 18

लीलाओं में लीला लीला श्यामा श्याम।

भक्तों में भक्त तो है भक्त श्यामा श्याम।

प्रेमों में प्रेम तो है प्रेम श्यामा श्याम।

दानियों में दानी है दानी श्यामा श्याम।

तेजों में तेज तो है तेज श्यामा श्याम।

ऐश्वर्य में तो ऐश्वर्य श्यामा श्याम।

माधुर्य में तो माधुर्य श्यामा श्याम।

औदार्य में तो औदार्य श्यामा श्याम।

सौकुमार्य में तो सौकुमार्य श्यामा श्याम।

सौशील्य में तो सौशील्य श्यामा श्याम।

रासों में रास तो महारास श्यामा श्याम।

कृपाओं में है “कृपालु” कृपा श्यामा श्याम॥

ब्रज रस माधुरी · भाग २015
Source, meanings & reading links

Source book: Braj Ras Madhuri Part 2. जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज · राधा गोविंद समिति This is an unofficial, personal, partial collection.

English meaning: unavailable. A separate Hindi meaning is unavailable in this supplied source.

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